तुम कोई प्यार भरी ग़ज़ल तो नहीं !

न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ
यूँ ही बस आज़माना चाहता हूँ!
तुम कोई प्यार भरी ग़ज़ल तो नहीं
जाने क्यों गुनगुनाना चाहता हूँ!

न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ
यूँ ही बस आज़माना चाहता हूँ!
बिन तेरे कामिल नहीं ज़िन्दगी मेरी
संग तेरे इसका मुकम्मल ठिकाना चाहता हूँ!


न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ
यूँ ही बस आज़माना चाहता हूँ!
भटक रही है तन्हां रूह मेरी
तनहाइयाँ से रिश्ता मिटाना चाहता हूँ!

न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ
यूँ ही बस आज़मान चाहता हूँ!
होंगे हजारों तेरी खुशियों के हमसफ़र
ग़मों को तेरे अपना बनाना चाहता हूँ!


न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ
यूँ ही बस आज़मान चाहता हूँ!
तुमको पाने की तमन्ना तो है

पहले खुद को पाना चाहता हूँ!

                                                                                                                         #हिंदी_ब्लोगिंग 
                                             

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