बारिश ही तो है !!!!

बारिश ही तो है, भागिए मत, कोई छत मत खोजिए, साथ लाए छाते को बंद भी कर दिया कीजिए कभी–कभी किस बात का डर है? भीग ही न जाएँगे, तो क्या हुआ नमक थोड़ी है जो गल जाएँगे, पिघल जाएँगे और फिर जब इस बरसात के बाद सूरज सो कर उठेगा तो सूखा ही देगा आपके कपड़े तेज़ाब नहीं बरस रहा है मज़ा लीजिए मौसम का ..............

आपकी 999 वाली ब्रांडेड टी शर्ट भी सूख जाएगी और बरसात में उसका ब्रांड भी धूलकर कही छिप नहीं जाएगा बस अपने स्मार्ट फोने को जरा संभाल के पोलीथिन में रख लीजिए, आज-कल सारे रिश्ते इस में ही तो क़ैद है


उधर देखिए दूर तक सड़क साफ़ है कोई नहीं आएगा.....इत्मीनान से खड़े हो जाइये बीच सड़क में...
वो देखिए पोल लाइट की सुनहरी रौशनी में नाचती बरसात की बूंदों को........... कितनी खुश है आपसे मिलकर, आपके स्पर्श को पाकर, आप नहीं है उनसे मिलकर? 
  

अरे थोडा धीमा चलिए, जल्दी-जल्दी चलने से क्या बदल जाएगा, ह्म्म्म....!!!
ये मौसम बदलाव का मौसम है हमारे मन का, हमारी कल्पनाओं का, दिमाग से दिल की तरफ बढ़ने का, थोड़ी भूली सी शरारत एक बार फिर से करने का


याद कीजिए...............
अपने वो बचपन के दिन, वो कागज़ की कश्ती, उम्र की तरुनाई के वो दिन, कॉलेज में भीगे सिर आई वो लड़की, बारिश में नाचते वो नौनिहाल, इन्द्रधनुषी पंख फैलाए वो मोर आप के ना नुकुर के बावजूद बाइक में पूरे शहर का चक्कर लगवाते वो शरारती दोस्तऔर फिर एक हाथ में गर्म कॉफ़ी का मग और दुसरे में सिगरेट के वो दहकते काश................


मज़ा लीजिए कुदरत के इस बदलते मिजाज़ का  !!!!
थोडा भिगिये, खुद से मिलिए, मुस्कुराइए...... चली जाएगी ये बरसात वापस कुछ दिनों के बाद, छुप जाएंगी इसकी बूंदे फिर से बादलों के पीछे, न जाने फिर कब ये अल्हड़ बादल रास्ता दें उन बूंदों को आपके स्पर्श का .... बरसात का दीवाना तो हर बदल है वो क्या जाने किस रह से जाना है किस छत को भिगोना है 


आप भी भिगिये इस बरसात में और बह जाने दीजिए इक-दूजे के बीच फैली गलत फहमियों को.................. 
बारिश ही तो है, वक़्त की तिजोरी में बंद भूली बिसरी यादों को तरों–ताज़ा करने का इक जरिया.......


बारिश ही तो है फिर से नए सपने बोने का मुक़म्मल मौसम ...............................   


#हिंदी_ब्लोगिंग  

2 comments:

  1. बहुत सुंदर भाव है

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यबाद चारू दी ...

      Delete