ऐसी ख़ुशी देखी है कहीं ?




ये बच्चे मुझे ऑफिस आते हुए सेक्टर 16 के मेट्रो स्टेशन के बाहर एक पान की दुकान पर दिख गए किसी के माँ-बाप पान,सिगरेट बेचते है तो किसी बूट पोलिश करते है वो दिन भर अपने इन नौनिहालों को ऐसे ही सड़कों पर बिना किसी डर के आज़ाद छोड़ रहते है एक हमलोग है अगर बच्चा जरा भी मिटटी में खेल ले तो फटा-फट उन्हें नेहला-धुला के साफ़ करते है हाईजीन, साफ़-सफाई ज़रूरी है कहीं इन्फेक्शन न हो जाए. बीमार न पड़ जाए। एक ये है मस्तमौले ग़ुरबत की ज़िन्दगी में आधे पेट खाए असली हंसी बिखेरते। यकीन मानिये कभी किसी झोपड़ पट्टी में किसी गरीबों की बस्ती में जाइए वहां आपको ज़्यादातर बच्चे भूखे मिलेंगे मगर ज़िन्दगी से डरे एवं रोते नहीं मिलेंगे

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