रिर्पोटर- बताए आपको कैसा महसूस हो रहा है?


हालांकि ऐसी शर्मसार कर देने वाली मीडिया रिर्पोटिंग की घटना न पहली बार हुई है न ही अकेले ऐसी घटनाएं सिर्फ भारत में हुई है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान से लेकर दुनिया में अपनी बादशाहत कायम कर चुके अमेरिका एवं ब्रिटेन में भी इस प्रकार की बचकाना हरकतों वाली तीसरे दर्जे की रिर्पोटिंग कई बार कई पत्रकारों द्वारा की गई है। वही उनके मीडिया संस्थानों द्वारा बिना अपने विवेक के इस्तेमाल के बड़ी ही जल्दबाजी में इस प्रकार की खबरें प्रकाशित-प्रसारित भी की गई है। मगर इन सब के बीच सीधा एवं साधारण सवाल जो हर बार पीछे छूट जाता है, वो ये है कि कब हमारा मीडिया ऐसे मामलों की संवेदनशीलता को समझते हुए रिर्पोटिंग करना सीखेगा?

मीडिया पर हावी सबसे पहले सबसे तेज खबरेंदर्शेकों तक पहुंचाने की होड में होने वाली भयंकर गलतियों ने एक तरफ जहां इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाया है वहीं कई मीडिया संस्थानों की कार्यशैली एवं उनकी ग्राउंड रिर्पोटिंग को हंसी का पात्र बनने से नहीं छोड़ा। वहीं कई मामलों की रिर्पोटिंग तो शायद इसलिए भी आपत्तिजनक मानी गई क्योंकि वो देश की सुरक्षा के लिए खतरा एवं आपसी भाईचारे को बिगाड़ने वाली रही है।


ताजा मामला झारखंड के गढ़वा जिले का है जहां के निवासी चंद्रेश यादव को पति-पत्नी के आपसी विवाद गुस्साए ससुराल वालो ने जिंदा जला दिया। बाद में स्थानीय सदर अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। घटना धुरकी बंशीधर मेनरोड के पास की है। इस घटना की एक दिल दहला देने वाली तस्वीर मीडिया जगत के कार्य करने के तरीके पर ठीक वैसे ही सवालिया निशान लगाती है जैसे पहले इस प्रकार की रिर्पोटिग पर उठ चुके है।

किसी स्थानीय चैनल का रिर्पोटर आग में झुलस चुके मृतक चंद्रेश यादव से क्या पूछ रहा है एवं उस वक्त उसके दिमाग में अपनी पत्रकारिता की जानकारी को लेकर किस प्रकार की रिर्पोटिंग करने की प्लांनिग चल रही थी। ये तो वो ही जाने मगर क्या एक्सक्लूसिव या सबसे पहले सबसे तेजरिर्पोटिंग के इस तरीके को जायज ठहराया जा सकता है?

इससे पहले भी ऐसा देखने को मिला है कि जब पत्रकार रिर्पोटिंग के दौरान अपनी मर्यादा लांघते रहे है। साल 2013 में उत्तराखं डमें आई बाढ़ की रिर्पोटिंग करने वाले एक निजी टीवी चैनल न्यूज एक्सप्रेस के रिर्पोटर नारायण परगाई ने अपना पूरा पीटूसी एक बाढ़ पीड़ीत के कांधे पर चढकर किया।

हालांकि ये रिर्पोट उनकी संस्था ने अपनी स्टोरी में प्रकाशित नहीं की एवं नारायण को नौकरी से निकाल दिया। मगर किसी ने उनका ये आपत्तिजनक विडियों यूटयूब पर अपलोड कर दिया था जिसे नारायण परगई़ं ने अपने विरूध साजिश बताया था मगर वे अपनी बेवकूफी भरी रिर्पोटिंग को जस्टिफाई नहीं कर पाए थे।

वहीं पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई नोटबंदी की खबर को भी कुछ बडे़ मीडिया संस्थानों ने बिना जांच के बस सबसे तेज खबर के नाम पर गलत जानकारी के साथ चलाया। मीडिया संस्थानों द्वारा किया गया ये दावा कि नए नोट में माइक्रोचिप लगी होगी ने उन्हें हंसी का पात्र तो बनाया ही साथ ही उनकी गलत रिर्पोटिंग ने उनके काम करने के तरीेके पर भी सवालियां निशान लगाया।


ऐसी ही मीडिया रिर्पोटिंग से बचने के लिए एवं लोगों तक सहीं एवं संतुलित रिर्पोट पहुंचाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बीबीसी के सीइओ टोनी हाॅल ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे जल्द ही स्लो न्यूज कांसेप्ट पर काम करने की तैयारी कर रहे है ताकि भले ही उनके पाठकों तक खबरें देर से पहुंचेगी मगर वे सारी जांची-परखी हुई होंगी

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