कौन हूँ मैं ???

!! हर बार आँख खुलती तो सोचता हूँ कि कौन हूँ मैं ,
ध्यान से जब दर्पण देखा,परेशानियों से घिरा एक मानव हूँ मैं !!

!! दुःख में तकलीफ से जूझता हूँ मैं
आंसू भी निकलते हैं तो पोंछ लेता हूँ मैं !!

!! लोगों ने कहा कि गुज़रा हुआ कल हूँ मैं,
समय के साथ हमेशा झगड़ लेता हूँ मैं !!

!! न जाने कल क्या होगा ये सोचकर
आदर-अनादर सब भूल जाता हूँ मैं !!

!! बाद में सोचकर पछताता हूँ मैं
कभी मन में बैर नहीं रखता हूँ मैं !!

!! फिर भी लोग सोचते हैं कि कितना फ़ालतू हूँ मैं,
हक़ीक़त मैं आखिर कौन हूँ मैं !!


!! भगवान को किनारे कर आगे बढ़ जाता हूँ मैं
फिर सोचता हूँ कि ऐसा क्यों करता हूँ मैं !!

!! चाहत को भी अपनी पा न सका हूँ मैं
उसके लौटने के इंतज़ार मैं बैठा हूँ मैं !!

!! आँख बंदकर विश्वास कर लेता हूँ मैं
जो अपना ना हो उसे भी अपना लेता हूँ मैं !!

!! जानकर भी ज्ञान से अज्ञानी हूँ मैं
ये समझ नहीं आता के आखिर कौन हूँ मैं !!

!! उजाले के भी पीछे छुपकर खड़ा हूँ मैं
समझ नहीं आता क्या कर रहा हूँ मैं !!

!! टिपण्णी सब देने लगे अलग-अलग भावनाओं से
पता तो है नहीं उन्हें के मैं हूँ कहाँ से !!

!! आँखों की नमी मैं भी कुछ ख्वाब देखता हूँ मैं
कौन समझे के आखिर कौन हूँ मैं !!

!! खुद क्या हूँ यही समझ लूँ मैं
बाकी क्या बोलें उससे क्या करूँ मैं !!

!! आत्मा को परमात्मा से मिला लूँ मैं
यही एक विकल्प आजमा लूँ मैं !!

!! जीवन का मूल समझ जाऊं मैं ,
जीने मैं क्या है बस जीना सीख जाऊं मैं !!

!! तभी ज्ञात होगा की कौन हूँ मैं
कवि की कल्पना नहीं एक हकीकत हूँ मैं !!

!! मैं ही जानता की कौन हूँ मैं
कल्पना का एक आधार हूँ मैं !!

!! वैसे तो हमेशा से निराकार हूँ मैं
ब्रह्माण्ड की परिस्थितियों का आकार हूँ मैं !!

                                                     
                                                                                                                   

                                                                                                                          बर्बीत बेहरा की कलम से !

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