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अब बताओ डिप्रेशन कैसा है?

डिप्रेशन ग्रस्त एक सज्जन जब पचास साल से ज्यादा के हो गये तो उनकी पत्नी ने एक काउंसलर का अपॉइंटमेंट लिया। पत्नी ने काउंसलर को बताया:- "ये भयंकर डिप्रेशन में हैं , " और इनकी ऐसी मनोस्थिति के कारण मैं भी ठीक नही हूँ।   पत्नी की बातें सुनने के बाद  काउंसलर   ने काउंसलिंग शुरू की, उन्होंने उस व्यक्ति से  कुछ निजी बातें भी पूछी और उसकी पत्नी को बाहर बैठने को कहा। सज्जन बोलते गए… बहुत परेशान हूं… चिंताओं के बोझ तले दब हुआ हूं… नौकरी का प्रेशर... बच्चों के एजूकेशन और जॉब की टेंशन... घर का लोन , कार का लोन... कुछ मन नही करता... दुनिया मुझे तोप समझती है... पर मेरे पास कारतूस जितना भी क्षमता नही.... मैं डिप्रेशन में हूं... कहते हुए पूरे जीवन की किताब खोल दी।   तब विद्वान काउंसलर ने कुछ सोचा और पूछा , " दसवीं में किस स्कूल में पढ़ते थे ?" सज्जन ने उन्हें स्कूल का नाम बता दिया। काउंसलर ने कहा:- " आपको उस स्कूल में जाना होगा। आप वहां से आपकी दसवीं क्लास का रजिस्टर लेकर आना , अपने साथियों के नाम देखना और उन्हें ढूंढकर उनके वर्तमान हालचाल क
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रंग

!! खूबसूरत हो तुम गुलाब सी  रंग बे-नज़ीरी का है एक ये भी !!   !! पास हो तुम दूर भी  रंग अहसास का है इक ये भी !!  !! अपनी हो तुम पराई भी  रंग रिश्तों का है इक ये भी !! !! तमन्ना हो तुम बे-पायां सी  रंग इंतेहाई का है एक ये भी !!  !! ख्व़ाब हो तुम हक़ीकत भी  रंग तसव्वुर का है एक ये भी !! !! साथी हो तुम रहबर भी  रंग सफ़र का है एक ये भी !! 

एच1 एन1 इन्फ्लुंज़ा- जिसने लील ली थीं करोड़ों ज़िंदगियाँ !

कोरोना से संकटग्रस्त पूरी दुनिया के मौजूदा हालात को देखकर ऐसा लगता है जैसे हम सभी हॉलीवुड की कोई साइंस फिक्शन/सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म देख रहे हों। जिसमें कुछ इंसानों की गलती का खामियाज़ा पूरी मानव जाति के अस्तित्व पर संकट बन मंडरा रहा हो।   जिसमें हर इंसान अब इस डर के साथ अपनी ज़िंदगी काट रहा हो कि अगला नंबर उसका ही लगने वाला है। हम रोज़ाना ज़िंदगी से एक दिन और, एक दिन और उधार मांगकर जी रहे हों। ऐसे में पता नहीं कब ज़िंदगी हमें ये उधार देना बंद कर दें, कब एक छोटी सी गलती हमें उस संकट के और नजदीक ले जाए जहाँ से वापस ज़िंदगी का रास्ता फ़िलहाल खोजे नहीं मिल रहा।   लेकिन सच तो ये है कि न ही ये कोई बुरा सपना है और न ही हम हॉलीवुड की कोई साइंस फिक्शन/सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म। देख रहें हैं। बल्कि ये मानव सभ्यता का वो एक कड़वा सच है जिसे लगभग पूरी मानव जाति भोग रही है।वहीं जो लोग फ़िलहाल इससे बचें हुए हैं वो भी डरे हुए हैं। क्योंकि कोई नहीं जानता कि ये अदृश्य बीमारी कब दबे पाँव उनके दरवाज़े पर दस्तक दे दें।   ऐसे में सवाल ये है कि क्या मानव सभ्यता के इतिहास में ऐसी भयंकर घटना पहली बार घट रही है

हंगामा क्यों है बरपा, पूछताछ ही तो की है ?

अर्णव   गोस्वामी के अलावा भी पूरे देश में ऐसे सैकड़ों पत्रकार हैं जो अपना काम बड़ी मेहनत और ईमानदारी से करते हैं। हाँ ये अलग बात है कि वो इतने रसूखदार नहीं हैं कि किसी नेता, मंत्री या राजनीतिक दल या देश की मीडिया ये मठाधीशों को उनकी चिंता हो। ताज़ा उदहारण के तौर पर याद कीजिये उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के सामान्य से पत्रकार पवन जायसवाल को, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा इसलिए प्रताड़ित किया गया, उसपर मुकदमा कर दिया गया।   क्योंकि उसने अपनी एक ग्राउंड रिपोर्ट में मिडडे मील के नाम पर सरकारी स्कूल के बच्चों को नामक रोटी परोसने की घटना को उजागर किया था। न कि स्टूडियो में बैठकर कोरे आरोप लगाए थे। ऐसी स्पष्ट और साहसिक पत्रकारिकता करने वाले मीडियाकर्मी के लिए क्या किसी बड़े पत्रकार ने, मीडिया के मठाधीश ने इंसाफ दिलाने के लिए कोई पहल की ?         ऐसे में अर्णव गोस्वामी का पक्ष लेने वाले पत्रकारों, नेताओं आदि को ये याद रखना चाहिए कि, अर्णव पूरे भारतीय मीडिया या भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि नहीं है। साथ ही वर्तमान में वो एक बड़े मीडिया हाउस के मालिक भी हैं इसलिए इस बात से कतई इंकार नहीं किया ज

गूगल ने इस ऐप की सेवा लेनी बंद कर दी है, आप भी बंदकर दीजिये!

ज़ूम ऐप नाम तो सुना ही होगा आपने! पूरी दुनिया में   कोरोना   संक्रमण के कारण जब लोगों के कामकाज में दिक्कतें आने लगी। तो ,  वर्क फ्रॉम होम   या बाक़ी ऑनलाइन कामों के लिए दुनियाभर के लोगों ने एक दूसरे से जुड़ने के लिए   ज़ूम ऐप   का सहारा लेना शुरू कर दिया। जिससे न ही सिर्फ़ इस ऐप के यूज़र्स/डाऊनलोड्स की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई। बल्कि ज़ूम ऐप बनाने वाली कंपनी के सीईओ   एरिक युआन   की कमाई में भी बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली।   लेकिन अब इस ऐप को लेकर रोज़ाना जिस तरह के ख़ुलासे सामने आ रहे हैं वो डराने वाले हैं ,  वो चौकाने वाले हैं  साइबर सुरक्षा   के विशेषज्ञों के हिसाब से इस ऐप पर यूज़र का डाटा बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। यानी अगर आप इस ऐप को अपने मोबाइल फोन के ज़रिए इस्तेमाल में लाते हैं तो ये आपके मोबाइल फोन के डेटा   की सेंधमारी कर सकता है। वहीं अगर आप इसे अपने लैपटॉप/डेस्कटॉप के ज़रिए इस्तेमाल में लाते हैं तो ये आपके लैपटॉप में मौजूद सारा डेटा उड़ाकर किसी भी   हैकर   तक पहुंचा सकता है।   गूगल जैसी टेक विशेषज्ञ कंपनी भी न जाने कब इस   असुरक्षित   ऐप के जंजाल में फंस गई।