Skip to main content

ऊँची दूकान फिंके पकवान

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) द्वारा पिछले महीनें जारी किए गए नए आंकड़ों नामों में देश विदेश के कई बड़ी दिग्गज कम्पनियों जैसे की एयरटेल, कोका-कोला, एप्‍पल, समेत कई कंपनियों के विज्ञापनों पर ऐतराज जताया है। ASCI का कहना है की इनके विज्ञापन भ्रामक हैASCI ने ज्‍यादातर विज्ञापनों को गुमराह करने वाला बताया है जनवरी में जारी हुए 143 कंपनियों को ऐसे ऐड जारी करने के लिए ASCI फटकार भी लगाई है।
ASCI की ग्राहक शिकायत परिषद (CCC) को 191 से भी ज्‍यादा शिकायतें आईं थी। अमूल, निविया, मोबिक्विक, स्‍टैंर्ड्ड चार्टर्ड बैंक, एचयूएल, परनॉड रिकॉर्ड एवं ओपरा, सहित अन्‍य कई बड़े नामों वाली कंपनियों के विरुध ग्राहकों ने ये सारी शिकायतें दर्ज करवाई थी। ASCI ने जहां हेल्‍थकेयर प्रोडक्ट से जुड़ी 102 शिकायतों को सही माना। वहीँ फूड व बेवरेजेस में 6 पर्सनल केयर से संबंधित 7 एवं शिक्षा से जुड़ी 20 शिकायतों को सही माना। साथ ही 8 एडवर्टाइजमेंट को भी गुमराह करने वाला पाया।
ASCI ने कोका कोल इंडिया द्वारा थम्स अप के प्रचार में एक बाइक सवार को सड़कों पर लोगों के बीच करतब करते हुए दिखाया है। ASCI के मुताबिक कंपनी का ये प्रचार खतरनाक कारनामे को प्रोत्साहन देता है।

ASCI फोन कंपनी एप्‍पल इंडिया को उसके प्रोडक्ट iPhopne7 के लिए गलत तस्वीर के द्वारा प्रचार करने का दोषी पाया। एप्‍पल इंडिया ने एप्‍पल iPhopne7 के विज्ञापन में iPhopne7 Plus को दिखाया था, यह लोगों को गुमराह करने वाला था। हालाँकि यह प्रोडक्‍ट एप्‍पल का ही था, मगर विज्ञापन जिस सामान विशेष का था उससे इसका कोई संबंध नहीं था। इससे यह समझ आता आता है कि यह ग्राहक को गुमराह करने वाला विज्ञापन है। हालांकि, इस संबंध में एप्‍पल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गयी है।

ASCI ने यह माना कि डिस्‍क्‍लेमर में ऐसा प्रयास न करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन फिर भी यह खतरनाक था। और इस विज्ञापन से लापरवाही को बढ़ावा मिलता है।
वहीँ टेलिकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल के खिलाफ की गयी 3 शिकायतों को भी सही ठहराया गया। एयरटेल पर आरोप है की फ्री लोकल और एसटीडी कॉल्‍स के नाम पर उसने अपने ग्राहकों को गुमराह करने वाला विज्ञापन चलाया।
#हिंदी_ब्लोगिंग 

Comments

Popular posts from this blog

राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

दरअसल यहाँ सिर्फ़ ये बात ख़ास नहीं है कि एक किरदार विशेष को पूरी कहानी में तवज्जों दी गई है। बल्कि इस फ़िल्म की ख़ासियत ये है कि फ़िल्म का मुख्य कलाकार कोई और नहीं बल्कि फ़िल्म का कैमरा है। जो फ़िल्म के मुख्य किरदार का रोल निभाता है जिसके इर्द-गिर्द फ़िल्म की कहानी घूमती है।

दर्शक इस मुख्य किरदार को देख तो नहीं …

क्या थीं इन अपराधियों की अंतिम इच्छा, यहाँ पढ़ें!

भारत सहित दुनिया के कई देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान आज भी मौजूद है। हालाँकि भारत में फांसी की सज़ा'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधियों को ही दी जाती है। इस कठोर सज़ा के एक बार पक्के हो जाने के बाद ऐसी कई प्रक्रियाएँ होती हैं जिनसे जेल मेन्युअल के तहत हर मुज़रिम को गुज़ारना पड़ता है। ऐसी ही एक ख़ास प्रक्रिया होती है मुज़रिम की अंतिम इच्छा जानने की। जिसे जेल मेन्युअल के तहत मानवीय आधार पर हर मरने वाले से पूछा जाता है और फिर अधिकारी उस पर निर्णय लेते हैं कि क्या अपराधी की अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है या नहीं?


ऐसे में जब साल2020की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।
माइकल नेय- नेपोलियन की सेना के इस बहादुर कमांडर ने अपनी मौत से पह…

...इसलिए भारत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर छा रहें हैं मंदी के बादल !

भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल पिछले कुछ महीनों से स्पष्ट रूप से आने वाली मंदी के संकेत दे रही है। हालांकि अर्थव्यवस्था के जानकारों को ये दबाव एक के बाद एक किये गए नोटबंदी और जीएसटी के प्रयोग के तुरंत बाद से ही समझ आने लगा था। मगर केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये के कारण इसका कोई ठोस हल नहीं निकल पाया। मेरे अपने शहर जमशेदपुर जहां एशिया की सबसे विशाल(Adityapur IndustrialAreaDevelopment Authority - AIADA Jharkhand India). में स्थित 1100 छोटी-बड़ी फैक्टरियां इस मंदी की शुरूआती भेंट चढ़ चुकी हैं
कारण टाटा मोटर्स का अपना उत्पाद घटाया जाना। जिनके लिए ये सभी फैक्टरियां विभिन्न प्रकार के ऑटो पार्ट्स बनाती थी। आप खुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितने लोग बेरोज़गार हुए होंगे कितने परिवारों की रोज़ी-रोटी का संकट आन खड़ा हुआ होगा। मगर दुर्भाग्य से ये संकट शायद जल्द न टल पाए क्योंकि डगमगाती भारतीय अर्थव्यवस्था के बाद अब जर्मनी और चीन जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियों ने भी बुरे संकेत देने शुरू कर दिए हैं पूरी ख़बर नीचे पढ़ें...

जीएसटी और नोटबंदी के प्रयोग से चरमराई भारतीय अर्थव्यवस्था एवं भारतीय बाज़ार में तेज़ी से ख़राब हो रही ऑटो…