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मेरा परिचय

अपने बारे में क्या लिखू, मेरे हिसाब से ये दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। बस इतना ही कहना चाहूँगा कि मैं एक बहुत ही साधारण किस्म का इन्सान हूँ, अगर कुछ ख़ास है मेरे बारे में कहने को तो वो है मेरा "साधारण" होना। एक बीमारी भी है "सोचने की बीमारी" मैं खुद को इससे बचा ही नहीं पाता "जो चल रहा है" “जो घट रहा है" मैं भी उसी को जीता हूँ, भोगता हूँ, जहाँ तक सब देखते है बस मैं उससे थोड़ा आगे देखने की कोशिश करता हूँ। गहराइयों में उतरने की आदत है मेरी। हालाँकि ज़्यादातर लोग इससे डरते है, बचते है, डूबने का खतरा जो होता है। लेकिन मैं अपनी कोशिश जारी रखता हूँ। बहुत सोचने और दोस्तों के कहने के बाद ये ब्लॉग शुरू किया है पता नहीं क्या और कब तक लिख पाऊंगा।  वैसे अगर नहीं लिखूंगा तो करूँगा भी क्या? बस एक कोशिश समझिये लिखने की, वो लिखने की जिसके बारे में शायद ज़्यादातर लोग न सोचते, है न सुनना चाहते है और न ही पढ़ना फिर भी कोशिश करूँगा की लिखूं शायद इसी का नाम नाफ़रमानी करना है।
                 
                                                                आते रहिएगा मेरे ब्लॉग पर थोड़ी गुफ्तगू करेंगे
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    शुक्रिया  
#हिंदी_ब्लोगिंग 

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