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"अन्नदाता सुखी भव:"

तामिलनाडु से आये किस्मत के मारे ये किसान कभी अपने मृत रिश्तेदारों की हड्डियाँ, खोपड़ी लेकर प्रदर्शन करते है। कभी मुँह में जिंदा चूहा रखकर अपनी टीस निकालते है, कभी नंगे होकर आपके कार्यलय में घुसने का प्रयास करते है। झुलसा देने वाली इस गर्मी में नंगे बदन सड़कों पर दिन-भर बैठे ये आपके अन्नदाता आपसे एक बार मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं ।


चावल सांभर भी ज़मीन पर सान कर खा रहे है मानो जीते जी नरक भोग रहे हो। मेरी तो हिम्मत भी नहीं हो रही की इस धूप में जंतर-मंतर जाकर इनसे मिल आऊ। वैसे भी मेरे मिलने से, इनका हाल पूछने से क्या हो जाएगा ? क्योंकी ये तो आपसे मिलने आये है पता है की इनके क़र्ज़ मॉफी की जिम्मेवारी आपकी नहीं बनती राज्य सरकार की है। मगर जब आप की सरकार नई नवेली उत्तर प्रदेश सरकार के क़र्ज़ मॉफी के फैसले में दखल दे सकती है तो यहाँ भी आप या आपका कोई नुमाइन्दा इनसे मिल सकता है। तामिलनाडु भी देश का हिस्सा है जैसे उत्तर प्रदेश और गुजरात है। वही गुजरात जहां कल आप प्रोटोकॉल तोड़ कर एक बच्ची से मिलने चले गए सुना है करोड़ों खर्च हुए आपके रोड शो में। खबर बना ली, फोटो खिचवा ली आपने अपने स्टारडम की बदौलत।



वैसे बच्चे इन किसानों के घर में भी है वो भी आपकी बाँट ज़ोह रहे है की कब आप उनके लिए भी अपना वक़्त निकालेंगे कब उनके माँ-बाप को इस क़र्ज़ के दलदल से निकलने में मदद करेंगे। वो भी ख़ुशी-ख़ुशी आपके साथ एक सेल्फी लेना चाहते है। वक़्त मिले तो इनके लिए भी प्रोटोकॉल तोड़िए मोदी जी। याद है आपको आपने संसद की कैंटीन की विजिटर्स बुक में क्या लिखा था ? "अन्नदाता सुखी भव:" मगर आपका अन्नदाता सुखी नहीं है मोदी जी वो सड़क पर आ गया है। फिर चुनाव तो तमिलनाडु में भी आने वाले सालों में होंगे तब आप वहां रैली करने सरकार को कोंसने जाएँगे कैसे कोंसेगे ? जब आज आप भी वहां के किसानों की मदद नहीं करेंगे बताइए ? अभी भी वक़्त है कुछ मदद कर दीजिए, अपने अन्न्दाता की। एक बार हिम्मत दिखाईये एक बार मिल लीजिए ।

#हिंदी_ब्लोगिंग 

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