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ना भागते तो सालों पहले पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते गुरुंग चक्रबर्ती

हैप्पी बर्थडे मिथुन दा 


आज गुरुंग चक्रबर्ती यानि मिथुन चक्रबर्ती का जन्मदिन है. मगर कम की लोगों को पता होगा की अगर वक़्त रहते वो अपना रास्ता न बदलते तो न ही वो हीरो बन पाते न ही आज जिंदा होते. दरअसल मिथुन चक्रबर्ती फ़िल्मी दुनिया में आने से पहले एक नक्सली थे जिनके पीछे हर वक़्त पुलिस लगी रहती थी. उनके बड़े भाई भी नक्सली थे जिनकी पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद मिथुन चक्रबर्ती को मजबूरन बंगाल से भाग कर पुणे आन पड़ा. नहीं तो उनका भी एनकाउंटर हो जाता जिसके शायद आर्डर  भी जारी किए जा चुके थे.  पुणे से ही मिथुन चक्रबर्ती का नया सफ़र शुरू हुआ.

पत्रकार से कहा पहले खाना खिलाओं- 


लम्बे संघर्ष के बाद मिथुन चक्रबर्ती को एक फिल्म में ठीक-ठाक काम तो मिला मगर कोई खास फायदा नहीं हुआ. फिल्म के हिट हो जाने के बाद भी मिथुन की कोई पहचान नहीं बनी. वे बिना खाए-पिये महीनों पुणे की  सड़कों पर यूँ ही भटकते रहे . बाद में एक दिन अचानक  किसी फ़िल्मी पत्रकार ने उन्हें सड़क किनारे घूमते हुए पहचान लिया. मिथुन ने पहले तो उस पत्रकार को न कह दिया, बाद में जोरो की भूख और पॉकेट में एक ढेला भी नहीं होने की मज़बूरी में मिथुन उनसे बात करने को राज़ी हुए वो भी इस शर्त पर की वो पत्रकार उन्हें आज खाना खिलाएग. पत्रकार भी इस शर्त के लिए इसलिए राज़ी हो गया क्योंकी उसे अपने अखबार के लिए एक अच्छी स्टोरी जो मिलने जा रही थी.


ऊटी में अपने डूबते होटल बिज़नस को बनाया फायदे का सौदा-


फिल्मों में अच्छी तरह करियर बनाने के बाद मिथुन चक्रबर्ती ने होटल बिज़नस में अपने पैर रखे और तमिलनाडु के खुबसूरत स्थान से होटल का व्यापार शुरू किया. मगर लम्बे समय तक उन्हें इस व्यापार में कोई खास सफलता नहीं मिली जबकि वहां अक्सर कई हिंदी और प्रादेशिक भाषाओँ की फिल्मों की शूटिंग होती थी. मिथुन ने इस दौरान शूटिंग क्रू को सही जगह और इक्विपमेंट की परेशानियों से जूझते देखा. दरअसल हर शूटिंग क्रू को अपने भारी भरकम इक्विपमेंट्स दूर -दूर से ढोकर लाने होते थे जिससे फिल्म बनाने का खर्चा तो बढ़ ही जाता था साथ ही इक्विपमेंट्स के टूटने आदि का डर भी हमेशा बना रहता था .

निकला कमाई का नायब ज़रिया- 


फ़िल्मी दुनिया के अपने साथियों की इस परेशानियों को जान-समझ कर मिथुन चक्रबर्ती ने एक आईडिया सोचा. उन्होंने अपने होटल को शूटिंग के लायक बनाने का निर्णय लिया इसके लिए  उन्होंने अपने होटल में  ऐसे कुछ बदलाव  किए ताकि वो फिल्मों की शूटिंग के लायक एक आदर्श जगह बन जाए. साथ ही उन्होंने कई तरह के शूटिंग इक्विपमेंट्स को भी खरीद कर परमानेंट वहीं रख दिया ताकि शूटिंग के लिए किसी भी क्रू को बाहर से सामान ढोकर न लाना पड़े. इससे जहां  उनके होटल की अच्छी कमाई शुरू हो गयी वहीँ शूटिंग के लिए आने वाले प्रोडक्शन हाउसेस को भी कई तरह के फायदे मिले.  

#हिंदी_ब्लोगिंग 

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!! न जाने कल क्या होगा ये सोचकर आदर-अनादर सब भूल जाता हूँ मैं !!
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! तू जब बिछड़ेगी !

!! तू जब बिछड़ेगी तो कयामत होगी कम फ़िर भी न किसी क़ीमत पर मेरी चाहता होगी !!
!! तेरी बातों को यादकर हसेंगे-रोयेंगे संग तेरे बिता हर लम्हा मेरी ताउम्र की दौलत होगी !!
!! रख लेना मुझे याद किसी बुरी याद की तरह फिर भी न कभी तुझसे कोई शिकायत होगी !!


!! लौट आने की तेरे दुआ हम रोज़ पढ़ेंगे न जाने किस घड़ी ख़ुदा की हमपर रहमत होगी !!
!! तेरी तस्वीरों से सजाऊंगा अपने घर की दीवारें हर घड़ी मेरे अंजुमन में तेरी ही महक होगी !!
!! तू जब बिछड़ेगी तो क़यामत होगी कम फ़िर भी न किसी क़ीमत पर मेरी चाहता होगी !!