Skip to main content

ऐसे करें खाद्य पदार्थ संबंधी कंपनियों की शिकायत

बात नामी-गिरामी रेस्टोरेंट की करें या फिर पैकेट बंद खाने के विभिन्न आइटम्स बेचने वाली देसी-विदेशी कंपनियों की! भारत में ऐसी ख़बरें अक्सर ही देखने-पढ़ने को मिल जाती है कि अमुक कम्पनी के खाद्य पदार्थ में मरा हुआ कॉक्रोच, कीड़े वगेरा मिले मगर जानकारी के अभाव में एवं पश्चिमी देशों की तुलना में हमारें देश भारत में उपभोगता संरक्षण के कमज़ोर नियमों के कारण आम उपभोगता ऐसे मामलों में कुछ खास कार्यवाही कर ही नहीं पाता। हालाँकि ऐसा नहीं है कि भारत में उपभोगता के अधिकार को लेकर कोई उपयुक्त नियम नहीं है. मगर जानकारी और जागरूकता के अभाव में अक्सर ऐसे मामले घर के अन्दर ही रफा-दफा हो जाने है। 

जबकि पश्चिमी देशों में तो ऐसी घटनाओं से वहां की जनता एवं उपभोगता संरक्षण, उपभोगता अधिकारों के जानकार बड़ी कड़ाई के साथ निपटते हैवहीँ भारत में ज़्यादातर उपभोगता बहुत हुआ तो कंपनी के द्वारा फ़ूड पैक पर दी गयी ईमेल आई डी पर या तो ईमेल कर अपना गुस्सा निकल लेते है या फिर दौबारा उस कंपनी के सामान खरीदने से तौबा करके। 

आइये आपको बताते है भारत में ऐसे मामलों को लेकर आप कहां शिकायत कर सकते जहां से आपको सही मायनो में न्याय मिल सके और खाद्य पदार्थों से जुड़े ऐसे कौन से मामले है जिन्हें काफी गंभीरता से हर उपभोगता को लेना चाहिए। 
·        
    यदि कोई दुकानदार आपको एक्सपायरी सामान बेच देता है तब

·         यदि कोई दूकानदार आपको दूषित, अशुद्ध खाद्य सामान बेच दे तब


·         यदि कोई रेस्टोरेंट दुकानदार आपको मिलावटी खाद्य सामग्री बेच दे तब

·         यदि कोई आपको खबर पैकिंग वाला सामान बेच दे तब

·         यदि सामान की पैकिंग रेपर पर सामान बनाने वाली कंपनी से जुड़ी जानकारी एवं सामान बनने में इस्तेमाल की गयी सामग्री की पूर्ण जानकारी, उसके बनने की तारीख एवं एक्सपाईरी डेट न प्रकाशित हो या उसके साथ कोई छेड़-छाड़ की गयी हो तब

·         आमतौर पर सामानों पर दी जाने वाले निर्देश चेतावनी यदि उपलब्ध न हो तब

उपभोगता दिए गए लिंक के द्वारा https://foodlicensing.fssai.gov.in/cmsweb/ या गूगल प्ले स्टोर से FSSAI के Food Safety Connect application की सहायता से अपनी शिकायत रजिस्टर्ड कर सकते है। 




              

Comments

Popular posts from this blog

कादर खान- मुफ़्लिसी से मस्खरी के उस्ताद तक का सफ़र !

81 साल की उम्र में बॉलीवुड के हास्य अभिनेता एवं हिंदी फिल्मों के जाने माने अभिनेता कादर खान का निधन (Kadar Khan Died) हो गया। भारतीय फिल्मों (Indian Movies) के ज़्यादातर दर्शक कादर खान को उनके कॉमेडी वाले रोल्स के लिए जानते हैं। मगर असल मायनों में कादर खान का शुरूआती जीवन कितना संघर्ष भरा और दुखदायी रहा उसकी जानकारी शायद ही किसी को हों। मेरे इस ख़ास ब्लॉग में पढ़िए कादर खान की जिंदगी से जुड़े कुछ सच्चे किस्सों को...
कादर खान का परिवार मूलतः काबुल का रहनेवाला था। वे वहींएक मुस्लिम परिवार मेंजन्मे थें। उनके वालदैन बेहद ग़रीब थे। एक तरह से कहें तो खाने के लाले थे। कादर खान से पहले उनके तीन भाई और थे जो सभी आठ साल के होते-होते मर गए। जब कादर खान पैदा हुए, तब उनकी माँ का अपनी पिछली औलादों की मौत का डर फिर से उन्हें परेशान करने लगा। उन्हें लगा कि ये जगह उनके बेटे के लिए सही नहीं हैं। वे बेहद डरी हुई थीं ” उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वे कहाँ जाए। बहरहाल वे वहाँ से अपने पति के साथ निकल पड़ी और पता नहीं कैसेवेआजके मुंबई पहुँच गए। अनजाना मुल्क, अनजान शहर। न कोई जान-पहचान वाला न ही पास में एक धेला।

राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

दरअसल यहाँ सिर्फ़ ये बात ख़ास नहीं है कि एक किरदार विशेष को पूरी कहानी में तवज्जों दी गई है। बल्कि इस फ़िल्म की ख़ासियत ये है कि फ़िल्म का मुख्य कलाकार कोई और नहीं बल्कि फ़िल्म का कैमरा है। जो फ़िल्म के मुख्य किरदार का रोल निभाता है जिसके इर्द-गिर्द फ़िल्म की कहानी घूमती है।

दर्शक इस मुख्य किरदार को देख तो नहीं …

नई ई- कॉमर्स पॉलिसी- कहीं लेने के देने न पड़ जाएं !

डब्ल्यूटीओ के दबाव में भारत सरकार को भी अन्य देशों की तरह अपनी ई- कॉमर्स पॉलिसी लानी पड़ी है। हालाँकि भारत के खुदरा व्यापारियों के हितों के लिए नियम बनाने का वादा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले भी किया था। मगर जीत के बाद वो वादा भी अन्य चुनावी वादों की तरह ठंडे बस्ते में चला गया। जानकारी के अनुसार नई ई- कॉमर्स पॉलिसी1 फ़रवरी 2019 से लागू की जाएंगी।

वहीं फ़िलहाल जिस तरह का ड्राफ्ट भारत सरकार के द्वारा खुदरा व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए लाया जा रहा है वह कितना फायदेमंद होगा ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि- इस ड्राफ्ट के नए नियमों के मुताबिक कोई भीविदेशी निवेश वाली(E-Commerce Policy) ई- कॉमर्स कंपनी उन प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट ऑफर नहीं ला पाएंगी जिनमें उनकी खुद की हिस्सेदारी या प्रबंधकीय हस्तक्षेप है। जैसे कि अमेज़न की अपनी डिलीवरी पार्टनर Cloud tail Indiaमें है। 


दरअसल केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश वाली E-Commerce Companies के काम करने के नियमों पर नकेल तो साल 2018 के अंत से ही शुरू कर दी थी। जब उन्हें इस बात के लिए निर्देश दिए  गए थे कि अब वो इन्वेंटरी पर अप…