Skip to main content

कहीं आपके ऑफिस में भी तो नहीं घुस आया है ये सांप?

ये कहानी दुनिया के एक बड़े शहर में तेज़ी से बढ़ती एक प्राइवेट कंपनी और उसके कर्मचारियों के बीच बढ़ती आपसी दूरियों की हैकभी छोटे से कमरे से शुरू हुई इस कंपनी के मालिक ने अपने अपने कर्मचारियों के साथ मिलजुल कड़ी मेहनत और आपसी तालमेल से नई ऊचाईयों तक पहुचाया मगर ज्यो-ज्यो कंपनी आगे बढ़ती गयी आपसी तालमेल कहीं पिछड़ता चला गया अब भी मेहनत तो सब करते मगर पेशेवर तरीके से, किसी में भी अपने काम के प्रति पहले सा लगाव नहीं रहा किसी को किसी से कोई मतलब नहीं मालिक का ध्यान सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाने में रह गया था उसके साथ कंपनी के शुरूआती दिनों में जुड़े कई पुराने लोग अब सिर्फ कर्मचारी बन रह गए थे। जबकि कभी वे और कंपनी के मालिक काफी करीब थे।  


ज़्यादातर कर्मचारियों को छोड़कर सभी ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों, मालिक के लिए अगल से शानदार कैबिन तैयार हो गए थे अक्सर अपने कर्मचारियों के साथ बैठने वाले मालिक के कैबिन में अब बिना अपपोइंमेट लिए किसी का भी जाना मना हो गया था मालिक एवं ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों लिए अब एक प्राइवेट बाथरूम भी बन गया था जहां भी बाकि कर्मचारियों के जाने पर पाबन्दी थी धीरे-धीरे ऑफिस का पूरा माहौल नीरस होता चला गयाकब कौन आता कौन जाता किसी को पता नहीं चल पाता

एक दिन ऑफिस के पास के जंगल से एक सांप किसी तरह ऑफिस की बिल्डिंग में जा पहुंचा दिन भर इधर-उधर घूमते हुए सांप को जैसे ही मौका मिला वो मालिक एवं ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों लिए बनाए नए प्राइवेट बाथरूम में जा घुसा गिने चुने लोगो से ही मिलने वाले मालिक के ऑफिस आने के बारे में तो आज-कल कम ही लोगों को पता रहता था, वो कब ऑफिस आये कब नहीं एक दिन सुबह जब मालिक अपने ऑफिस के आलीशान में बाथरूम गया तो सांप ने उसे डस लिया मगर किसी भी कर्मचारी को खबर तक न हुई सबको लगा की अब वो बड़े आदमी हो गए है, होंगे किसी मीटिंग-कांफ्रेंस के लिए बाहर नहीं आ रहे होंगे ऑफिस
इस घटना के ठीक दूसरे दिन ऐसी ही घटना एक अन्य वरिष्ठ कर्मचारी के साथ हुई सांप ने उसे भी उसी नए बाथरूम में डस लिया मगर किसी भी निचले स्तर के कर्मचारी को इसकी कोई खबर नहीं हुई हालाँकि सांप ज्यादा जहरीला नहीं था मगर घटना की जानकारी समय पर न होने के कारण दोनों को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा. अगले दिन साफ़-सफाई करने वाला एक कर्मचारी जो साफ़-सफाई के अलावा ऑफिस के हर कर्मचारी के आदेश को मानता था। कभी किसी के लिए खाना तो किसी के लिए सिगरेट खरीद कर लाताकभी किसी के डेस्क की गंदगी को साफ़ करता तो कभी किसी की कार को वो किसी काम से नए बनाए बाथरूम में गया जहां उसने उस सांप को देख लिए और पास मूर्छित अपने दो बॉस को भी पूरा मामला समझते उसे देर न लगी मगर सांप क मारने-भागाने  के संघर्ष में उसे भी सांप से डस लिया

उधर बाहर उसे न पाकर ज़्यादातर कर्मचारी जो दिन-भर उससे अपना कुछ न कुछ व्यक्तिगत काम करवाते रहते है काफी परेशान हो गए उसे खोजते हुए जब दो-चार कनिष्ठ कर्मचारी नए बनाए बाथरूम में पहुंचे तो उनके रोंगटे खड़े हो गए ऑफिस के तीन लोग वहां मरणासन्न अवस्था में पड़े हुए थे साथ ही एक मर हुआ सांप भी वहां पड़ा हुआ था तुरंत ही पूरी खबर जंगल की आग की तरह पूरे ऑफिस में फ़ैल गयी, अस्पताल में डॉक्टर्स ने उस साफ़-सफाई वाले कर्मचारी को छोड़ बाकी दोनों को मृत घोषित कर दिया 

डॉक्टर्स का कहना था की इन्हें सांप ने कुछ दिन पहले डसा था और देर हो जाने की वजह से इन्हें बचा पाना संभव नहीं था जबकि साफ़-सफाई वाले की जानकारी सही समय पर मिलने से उसकी जान बच गयी  
    


सबक— कभी-कभी कामयाब होने की भूख हमें एक दुसरे से इतना दूर कर देती है कि अतीत में बनाए रिश्ते अपना वजूद खोने लगते है। कामयाब होना हर किसी का ख़्वाब होता है और हर किसी को उसकी मेहनत का फल भी मिलना चाहिए मगर अपनों को खोकर नहीं। उन रिश्तों की कीमत पर तो कभी नहीं जिनका होना कभी खुद में किसी कामयाबी से कम नहीं था।     

Comments

Popular posts from this blog

कादर खान- मुफ़्लिसी से मस्खरी के उस्ताद तक का सफ़र !

81 साल की उम्र में बॉलीवुड के हास्य अभिनेता एवं हिंदी फिल्मों के जाने माने अभिनेता कादर खान का निधन (Kadar Khan Died) हो गया। भारतीय फिल्मों (Indian Movies) के ज़्यादातर दर्शक कादर खान को उनके कॉमेडी वाले रोल्स के लिए जानते हैं। मगर असल मायनों में कादर खान का शुरूआती जीवन कितना संघर्ष भरा और दुखदायी रहा उसकी जानकारी शायद ही किसी को हों। मेरे इस ख़ास ब्लॉग में पढ़िए कादर खान की जिंदगी से जुड़े कुछ सच्चे किस्सों को...
कादर खान का परिवार मूलतः काबुल का रहनेवाला था। वे वहींएक मुस्लिम परिवार मेंजन्मे थें। उनके वालदैन बेहद ग़रीब थे। एक तरह से कहें तो खाने के लाले थे। कादर खान से पहले उनके तीन भाई और थे जो सभी आठ साल के होते-होते मर गए। जब कादर खान पैदा हुए, तब उनकी माँ का अपनी पिछली औलादों की मौत का डर फिर से उन्हें परेशान करने लगा। उन्हें लगा कि ये जगह उनके बेटे के लिए सही नहीं हैं। वे बेहद डरी हुई थीं ” उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वे कहाँ जाए। बहरहाल वे वहाँ से अपने पति के साथ निकल पड़ी और पता नहीं कैसेवेआजके मुंबई पहुँच गए। अनजाना मुल्क, अनजान शहर। न कोई जान-पहचान वाला न ही पास में एक धेला।

राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

दरअसल यहाँ सिर्फ़ ये बात ख़ास नहीं है कि एक किरदार विशेष को पूरी कहानी में तवज्जों दी गई है। बल्कि इस फ़िल्म की ख़ासियत ये है कि फ़िल्म का मुख्य कलाकार कोई और नहीं बल्कि फ़िल्म का कैमरा है। जो फ़िल्म के मुख्य किरदार का रोल निभाता है जिसके इर्द-गिर्द फ़िल्म की कहानी घूमती है।

दर्शक इस मुख्य किरदार को देख तो नहीं …

नई ई- कॉमर्स पॉलिसी- कहीं लेने के देने न पड़ जाएं !

डब्ल्यूटीओ के दबाव में भारत सरकार को भी अन्य देशों की तरह अपनी ई- कॉमर्स पॉलिसी लानी पड़ी है। हालाँकि भारत के खुदरा व्यापारियों के हितों के लिए नियम बनाने का वादा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले भी किया था। मगर जीत के बाद वो वादा भी अन्य चुनावी वादों की तरह ठंडे बस्ते में चला गया। जानकारी के अनुसार नई ई- कॉमर्स पॉलिसी1 फ़रवरी 2019 से लागू की जाएंगी।

वहीं फ़िलहाल जिस तरह का ड्राफ्ट भारत सरकार के द्वारा खुदरा व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए लाया जा रहा है वह कितना फायदेमंद होगा ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि- इस ड्राफ्ट के नए नियमों के मुताबिक कोई भीविदेशी निवेश वाली(E-Commerce Policy) ई- कॉमर्स कंपनी उन प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट ऑफर नहीं ला पाएंगी जिनमें उनकी खुद की हिस्सेदारी या प्रबंधकीय हस्तक्षेप है। जैसे कि अमेज़न की अपनी डिलीवरी पार्टनर Cloud tail Indiaमें है। 


दरअसल केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश वाली E-Commerce Companies के काम करने के नियमों पर नकेल तो साल 2018 के अंत से ही शुरू कर दी थी। जब उन्हें इस बात के लिए निर्देश दिए  गए थे कि अब वो इन्वेंटरी पर अप…