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अगस्त, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आपका भी कोई बाबा है क्या ?

15 सालों की लम्बी लड़ाई के बाद आज आखिर दोनों ही गुमनाम महिलाओं को न्याय मिल ही गया। बलात्कार के दोषी तथाकथित धर्मगुरू रामरहीम को न्यायलय ने सश्रम  10+10  कुल 20  सालों की सजा सुनाकर एक बार फिर आम भारतीय के भरोसे को जीत लिया है ।   आप इसमें से 10   राम का नाम बदनाम करने और 10   रहीम का नाम खराब करने की सजा भी मान सकते हैं।   हालांकी  भारतीय कानून के अनुसार रामरहीम के पास उच्च न्यायलय में अपील करने का विकल्प अभी उपलब्ध है। रैप से लेकर पॉप सांग गाने वाला ये बाबा कितना रंगीन मिजाज था ये बताने की जरूरत अब शायद नहीं बची है। मगर यहां सोचने वाली बात ये है कि कैसे ये बाबा लोग इतने मजबूत हो जाते है कि देखते ही देखते ये देश की कानून व्यवस्था के लिए संकट एवं मौजूदा राजनीति के लिए सिरदर्द बन जाते है। कौन पालता है इन्हें या फिर किसके फलने-फूलने में सहायक होते है ये लोग ? क्या इसके पीछे सिर्फ राजनेताओं एवं राजनीतिक दलों का निहीत स्वार्थ छिपा होता है या फिर उससे कहीं ज्यादा आम लोगों की वो भौतिक एवं आत्मिक आकंक्षाए जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वो सब ऐसे बाबाओं के द्वारा ही पूरी की जा सकती है। जिस

क्योंकि रोटी बड़ी मुश्किल से मिलती है!

कुछ दिनों पहले ये नजारा नोएडा सैक्टर सोलहा में देखने को मिला था। जरा सोचिए, जब कभी हमारें घरों के छोटे बच्चे ऐसी कोई उछल कूद करते है तब डर के मारे हमारी जान निकल जाती है। वहीं उस सबके उल्ट तकरीबन बारह-चैदह फिट की उॅंचाई पर चेहरे पर नकाब ढककर करतब दिखाती ये 10-11 साल की बच्ची और नीचे सड़क पर ढोल बजाकर लोगो को अपनी और आकर्षित करता उसका भाई और मां! तब ये शेर यादा कि !! हुनर सडकों पे तमाशा करता है और किस्मत महलों में राज !! !!जो दिया तुने बहुत दिया ए जिंदगी बहुतों को तो ये भी नसीब नहीं होता!!

क्योंकि ये भगवान दिव्यांग है

ये दोनों दिव्यांग गणपति कल मुझे मेरे आॅफिस के पास नोएडा में मिल गए। कोई इन्हें सड़क किनारे रेडलाइट के पास छोड़कर चला गया। सच में ये दुनिया बहुत बुरी है इंसान हो या भगवान दिव्यांग हो जाए तो उसकी कोई कद्र नहीं रहती।

बनिया बनने में हजार-दो हजार वर्ष लगेगा आदिवासियों को: डा. रामदयाल मुंडा

आज डा.रामदयाल मुंडा का जन्म दिन है , वे हमारे बीच नहीं , लेकिन उनका एक साक्षात्कार मेरे पास है जो हमने ' देशज स्वर ' के लिए लिया था A उनकी मृत्यु के बाद यह ' जनसत्ता ' में छपा और वंदना    की पत्रिका ' अखड़ा ' में भी A हमने उनसे नई औद्योगिक नीति और उदारीकरण के इस दौर में आदिवासी समाज पर मंडरा रहे अस्तित्व के संकट पर बातचीत की थी A बातचीत तो एक साक्षात्कार के रूप में शुरू हुआ , लेकिन एकाध प्रश्न के बाद ही सवालों का सिलसिला खत्म हो गया और वे खुद सवाल और जबाब बन गये A यह बातचीत मोहराबादी स्थित उनके आवास पर हुई थी हम आंगन में तन कर खड़े आकाश छूते शाल वृक्षों की छाया में बैठे थे और सन्नाटे में तिर रही थी उनकी आवाज.. आज मैं अपने मित्रों के लिए उसे फिर से जारी कर रहा हूं.. बनिया बनने में हजार-दो हजार वर्ष लगेगा आदिवासियों को: डा. रामदयाल मुंडा सरप्लस एकानामी , मैनेजमेंट का एक पक्ष. यहां का आदमी बाबाजी है A कल क्या खायेगा इसकी चिंता नहीं A अब उसका पाला पड़ा है उन लोगों से जो प्रबंधन में , जोड़-तोड़ में माहिर हैं. जबकि आदिवासी डेमोक्रेसी , सुपर डेमोक्रेसी

...... तो बैन हो जाएगा चीन का ये वेब ब्राउज़र

चीन की कम्पनी अलीबाबा का वेब ब्राउज़र यू सी ब्राउज़र जल्द ही भारत में बैन हो सकता है। दरअसल इस ब्राउज़र के चीनी वर्जन से डाटा लीक होने की खबर आने के बाद भारत सरकार ने इसकी जांच शुरू कर दी है। साल 2015 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटों की सिटिजन लैब में हुई जांच में ऐसी बात सामने आई थी कि यू सी ब्राउज़र के चीनी वर्जन से डाटा लीक होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की संस्था सी-डेक हैदराबाद के द्वारा  यू सी ब्राउज़र की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गयी है।  ऐसे में यदि जांच लैब द्वारा इस बात की पुष्ठी कर दी जाती है की ये ब्राउज़र सुरक्षित नहीं है तो भारत सरकार जल्द ही इसपर बैन लगा सकती है। गौरतलब है की काफी कम समय में चीन के इस वेब ब्राउज़र ने भारत में अपने पैर पसार लिए है।  ब्राउज़िंग के बाद इसका न्यूज़ एप यू सी न्यूज़ भी काफी प्रसिद्धि  प्राप्त कर चूका है। एक आकड़ें के अनुसार भारत के 50  प्रतिशत स्मार्ट मोबाइल फोन्स यूजर रोजाना इस वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल करते है। वहीँ इसका यू सी न्यूज़ एप एक बढ़ते हुए न्यूज़एग्रीगेटर के रूप में काफी फल-फुल रहा है। ऐसे में यदि आप भी इस ब्राउज़र का उपयोग क
 नज़र न लगे,  विरले ही है देश में ऐसे नज़ारे

कल कुछ अच्छा भले न बोलिए सच्चा ज़रूर बोलिए

हेल्लो मोदी जी..... हां कौन , जी जनता , पहचाने! मललब वही जिसे आप जिन्हें भाईयों और बहनों , मित्रों-मित्रों कहकर संबोधित करते है वही वाली जनता आपके देश की।   आपके कल के भाषण के लिए आपने जनता से आईडिया माँगा था न , रीमेम्बर ? याद आया..... ????? मेरे पास है कुछ मसालेदार आईडिया आपके कल के लाल कीले वाले भाषण के लिए सच में आगा लगा देंगे स्टेज पर। बस आप बोलने के लिए 56 इंच वाली छाती तैयार रखिये। सर अपने जबसे हमसे आईडिया मांगे थे तब से तड़प रहा हूँ की क्या बताऊ , क्या छोडू। वो क्या है न कि अब आप लोगों मतलब की पार्टी वालों की भी करतूते कम नहीं रह गयी है तो सोचा वही सब याद करा दूँ बोलने के लिए। अच्छा वो पानाम पेपर वाला मुद्दा कैसा रहेगा उससे शुरू कीजिये तो कैसा रहेगा? देखिए न  आतंकवाद की नर्सरी , स्कूल , कॉलेज चलाने वाले देश ने भी अपने प्रधानमंत्री को नहीं बक्शा। तो फिर आप तो पता नहीं कितनी बार किसकी-किसकी कसम खा चुके है कि भारत से भ्रष्ट्राचार ख़त्म करके ही रहेंगे। तो फिर बोलिए कुछ तगड़ा सा अपने भाषण में ।  कहिये कुछ अपने जबरा फैन्स को खुश करने वाला। दूसरा वो चीन का क्या करना