सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ऐसे बचाए अपने आधार कार्ड की जानकारी लीक होने से

आधारकार्ड की शुरुआत के दिनों में विपक्ष में रहते हुए भाजपा इसे असुरक्षित बताते हुए इस मुद्दे को लेकर जहां सुप्रीमकोर्ट कोर्ट तक चली गयी थी वहीँ सत्ता में आने के बाद आज वही भाजपा आधारकार्ड को हर सरकारी योजना से जोड़ने में आतुर है एवं निहायती सुरक्षित भी बता रही है

हमारी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है या नहीं इस बात पर सभी का अपना-अपना मत हो सकता है आपको यहाँ ये बता दूँ कि चीन सरकार द्वारा चलाई गयी ऐसी ही एक योजना से एकत्रित डेटा आज वहां की सरकार की गलतियों के कारण वहां की कई कंपनियों तक पहुँच चूका है जिसकी खबर कुछ समय पूर्व मीडिया में आई थी साथ ही हमारे यहाँ भी कई सरकारी पोर्टल्स से लाखों लोगों के आधार कार्ड की जानकारी लीक हो चुकी है इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी के आधार कार्ड के लीक होने की खबर मीडिया में खासी चर्चा में रही थी वहीँ चाइना में लीक हुए डेटा में वहां के आम नागरिकों के साथ ही कई प्रतिष्ठित लोगों के डेटा में भी सेंधमारी हो चुकी है जिसमें अलीबाब के फाउंडर जेक मा भी शामिल है


ऐसे में आधार कार्ड को अनिवार्य बना चुकी भारत सरकार क्या इसके दुरुप्रयोग से इसे बचा पाएगी?  इस बात को लेकर हर भारतीय के मन में कई सवाल हो सकते है क्योंकि अभी तक कोई साइबर एक्सपर्ट या सरकार का सम्बंधित विभाग ये नहीं बता पाया है कि यदि किसी भारतीय की आधारकार्ड द्वारा साँझा की गयी व्यक्तिगत जानकारी किसी कारणवश लीक हो जाती है और उसका दुरप्रयोग होने लग जाता है तो वहां व्यक्ति इसकी शिकायत किस विभाग में और किस प्रकार करे?
 
क्या सरकार द्वारा इस संम्बध कोई नियम-कानून बनाया गया है? क्या इसके लिए कोई विभाग या ऑनलाइन सेवा उपस्थित है? अगर है तो कौन सी एवं कैसे आप अपनी व्यतिगत जानकारी को सुरक्षित कर सकते है जानियें इस लेख में-


 आज इस ब्लॉग के द्वारा मैं आपके साथ साँझा करने जा रहा हूँ कैसे आप आधार कार्ड के लिए दी गयी अपनी व्यतिगत जानकारी (बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन) को लीक होने से बचा सकता है क्या है इसका तरीका जिसके द्वारा कोई भी आधारकार्ड धारक अपनी व्यक्तिगत जानकारी का दुरप्रयोग होने से बचा सकता है
इसके लिए आपको आधार कार्ड की अधिकारिक वेबसाइट  UIDAI की वेबसाइट  के इनरोलमेंट एवं अपडेट वाले वर्ग की आधार सर्विसेज पर क्लिक करना होगा उसके बाद लॉक-अनलॉक बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन पर क्लिक करें ऐसा करते ही आपके कंप्यूटर की स्क्रीन पर एक नई विंडो आ जाएगी अब अपनी बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन को लॉक करने के लिए आपको अपना आधार नंबर दिए गए खाने में दर्ज करना होगा ऐसा करने के बाद आपके आधारकार्ड के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP यानि One Time Password  आएगा अब  इस One Time Password को डालकर आपको लॉग इन वाले विकल्प पर क्लिक करना होगा इसके बाद आये एक सिक्यूरिटी कोड को आगे आये खाने में भरकर इनेबल के विकल्प को चुनना होगा

ऐसा करते ही आपकी आपकी बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन लॉक हो जाएगी जिसे कोई भी ऑथेंटीकेट नहीं कर पाएगा, यहाँ तक कि आप भी नहीं यदि आपभी अपनी बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन को किसी कार्य के लिए ऑथेंटीकेट करना या करवाना चाहेंगे तो आपको अपने आधार कार्ड को पुनः टेम्पररी अनलॉक करना होगा या फिर परमानेंटली डीसेबल करना होगा याद रखे टेम्पररी अनलॉकसिर्फ दस मिनट के लिए ही होगा            
क्यों ज़रूरी है अपनी बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन को गुप्त रखना-


आपकी बायोमेट्रिक इन्फोर्मेशन के लॉक हो जाने के बाद आपकी इजाज़त के बगैर कोई भी आपकी निजी जानकारी प्राप्त नहीं कर पाएगा यानि की आपकी व्यक्तिगत जानकारी का किसी भी तरह से दुरप्रयोग होने की संभावना ही समाप्त

आजकल कई निजी कंपनियां अपने नागरिको की जानकारी इकट्ठी कर अपने व्यापार के लिए पॉलिसी बनाने में इनका इस्तेमाल कर रही है हालाँकि ये देखने में कही से भी गलत नहीं है मगर बिना अनुमति के किसी की व्यक्तिगत जानकारी का व्यवसाय के लिए इस्तेमाल करना भविष्य के लिए घातक हो सकता है जिसके परिणाम से फिलहाल कोई भी परिचित नहीं है

चीन ने जो अपने नागरिकों का जो डेटा सार्वजानिक किया वो चीन की कम्पनियों को गया जबकि भारत में ज़्यादातर कंपनियां विदेशी है ऐसे में हम कहीं ज्यादा असुरक्षित हो सकते है

कोई भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान आपकी सभी गतिविधियों पर हमेशा नज़र बनाए रख सकता है आप कितना कमाते है? आपके बैंक अकाउंट का क्या स्टेटस है? आपके क्रेडिट कार्ड डेबिट कार्ड की डिटेल्स इत्यादि सभी का दुरप्रयोग हो सकता है 

सरकार एक के बाद एक हर कार्य के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर रही है क्या पता किस विभाग की गलती से आपका व्यतिगत डाटा किसी ऐसे हाथ लग जाए और बेवजह आपको उसका व्यतिगत नुकसान उठाना पड़े

ऐसी तैयारी सरकार के लिए तो अच्छी हो सकती है मगर एक ऐसे देश में जहां लोकतंत्र का राज है वहां इसे सही नहीं खा जा सकता चीन में कम्युनिस्ट विचारधारा की सरकार है जबकि भारत अपने लोकतान्त्रिक तरीके के लिए जाना जाता है       


टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

दरअसल यहाँ सिर्फ़ ये बात ख़ास नहीं है कि एक किरदार विशेष को पूरी कहानी में तवज्जों दी गई है। बल्कि इस फ़िल्म की ख़ासियत ये है कि फ़िल्म का मुख्य कलाकार कोई और नहीं बल्कि फ़िल्म का कैमरा है। जो फ़िल्म के मुख्य किरदार का रोल निभाता है जिसके इर्द-गिर्द फ़िल्म की कहानी घूमती है।

दर्शक इस मुख्य किरदार को देख तो नहीं …

क्या थीं इन अपराधियों की अंतिम इच्छा, यहाँ पढ़ें!

भारत सहित दुनिया के कई देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान आज भी मौजूद है। हालाँकि भारत में फांसी की सज़ा'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधियों को ही दी जाती है। इस कठोर सज़ा के एक बार पक्के हो जाने के बाद ऐसी कई प्रक्रियाएँ होती हैं जिनसे जेल मेन्युअल के तहत हर मुज़रिम को गुज़ारना पड़ता है। ऐसी ही एक ख़ास प्रक्रिया होती है मुज़रिम की अंतिम इच्छा जानने की। जिसे जेल मेन्युअल के तहत मानवीय आधार पर हर मरने वाले से पूछा जाता है और फिर अधिकारी उस पर निर्णय लेते हैं कि क्या अपराधी की अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है या नहीं?


ऐसे में जब साल2020की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।
माइकल नेय- नेपोलियन की सेना के इस बहादुर कमांडर ने अपनी मौत से पह…

हंगामा क्यों है बरपा, पूछताछ ही तो की है ?

अर्णव गोस्वामी के अलावा भी पूरे देश में ऐसे सैकड़ों पत्रकार हैं जो अपना काम बड़ी मेहनत और ईमानदारी से करते हैं। हाँ ये अलग बात है कि वो इतने रसूखदार नहीं हैं कि किसी नेता, मंत्री या राजनीतिक दल या देश की मीडिया ये मठाधीशों को उनकी चिंता हो। ताज़ा उदहारण के तौर पर याद कीजिये उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के सामान्य से पत्रकार पवन जायसवाल को, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा इसलिए प्रताड़ित किया गया, उसपर मुकदमा कर दिया गया। क्योंकि उसने अपनी एक ग्राउंड रिपोर्ट में मिडडे मील के नाम पर सरकारी स्कूल के बच्चों को नामक रोटी परोसने की घटना को उजागर किया था। न कि स्टूडियो में बैठकर कोरे आरोप लगाए थे। ऐसी स्पष्ट और साहसिक पत्रकारिकता करने वाले मीडियाकर्मी के लिए क्या किसी बड़े पत्रकार ने, मीडिया के मठाधीश ने इंसाफ दिलाने के लिए कोई पहल की ?

ऐसे में अर्णव गोस्वामी का पक्ष लेने वाले पत्रकारों, नेताओं आदि को ये याद रखना चाहिए कि, अर्णव पूरे भारतीय मीडिया या भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि नहीं है। साथ ही वर्तमान में वो एक बड़े मीडिया हाउस के मालिक भी हैं इसलिए इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि उनका इन्ट्रे…