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मेरे बारे में

!! मेरे बारे में कोई तो राय उनकी भी होगी
उसने भी कभी मोहब्बत की तो होगी !!

!! नहीं चाहते हम इम्तेहाँ और इश्क़ में
इम्तहाँ ए इश्क़ में गलतियाँ हमने की तो होंगी !!

!! रूठ कर यूँ ही नहीं चला जाता है अपना कोई
रूठने की इजाज़त उसने हमसे माँगी तो होगी !!


!! हर कोई दोस्त रहता नहीं बुरे वक़्त में लेकिन
दोस्ती बुरे वक़्त की सभी से होती तो होगी !!

!! समझ न पाऐ हम ज़िन्दगी की शर्तों को
ज़िन्दगी ने हमसे कोई ख़्वाहिश की तो होगी !!

!! मुकर जाना करके वादे निभाने के
सियासतदानों से उसकी पहचान पुरानी होगी !! 



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राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

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क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

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