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कल कुछ अच्छा भले न बोलिए सच्चा ज़रूर बोलिए

हेल्लो मोदी जी..... हां कौन, जी जनता, पहचाने! मललब वही जिसे आप जिन्हें भाईयों और बहनों, मित्रों-मित्रों कहकर संबोधित करते है वही वाली जनता आपके देश की।  
आपके कल के भाषण के लिए आपने जनता से आईडिया माँगा था न, रीमेम्बर ? याद आया..... ?????

मेरे पास है कुछ मसालेदार आईडिया आपके कल के लाल कीले वाले भाषण के लिए सच में आगा लगा देंगे स्टेज पर। बस आप बोलने के लिए 56 इंच वाली छाती तैयार रखिये।
सर अपने जबसे हमसे आईडिया मांगे थे तब से तड़प रहा हूँ की क्या बताऊ, क्या छोडू। वो क्या है न कि अब आप लोगों मतलब की पार्टी वालों की भी करतूते कम नहीं रह गयी है तो सोचा वही सब याद करा दूँ बोलने के लिए।
अच्छा वो पानाम पेपर वाला मुद्दा कैसा रहेगा उससे शुरू कीजिये तो कैसा रहेगा? देखिए न  आतंकवाद की नर्सरी, स्कूल, कॉलेज चलाने वाले देश ने भी अपने प्रधानमंत्री को नहीं बक्शा। तो फिर आप तो पता नहीं कितनी बार किसकी-किसकी कसम खा चुके है कि भारत से भ्रष्ट्राचार ख़त्म करके ही रहेंगे। तो फिर बोलिए कुछ तगड़ा सा अपने भाषण में कहिये कुछ अपने जबरा फैन्स को खुश करने वाला।

दूसरा वो चीन का क्या करना है कुछ बताइए मललब चाइना की बनी राखी मत खरीदों, मोबाइल मत लो, अब फिर दीपावली भी आ रही है। उधर सोशल मीडिया से लेकर मेट्रो की सीढियों तक राष्ट्रवाद की घुट्टी में घुले मासूम भारतीय सिग्नेचर कैंप चला-चला के आधे हुए जा रहे है कुछ कीजिये उनका । बाकि रामदेव बाब अलग लंगोटी खोंसकर दिनभर टीवी पर देशभक्त बनने का ज्ञान दे रहे है। उनसबको कैसे समझाए कि जब तक चाइना एवं अन्य विदेशी कम्पनियों का माल भारत आएगा तब तक बिकेगा और इस्तेमाल भी होगा। बंद क्यों नहीं करवाते वो सब? गज़ब कंफ्यूज कर रखा है आपने भी।  हटाइए ये WTO वगेरा का चक्कर, किससे डरते है आपउधर नागपुर मेट्रो के 69 कोच बनाने का भी ठेका 851 करोड़ में (चाइना रेलवे रोलींग स्टॉक कारपोरेशान) को दे रखा है फाडनविस जी ने।  इधर आपके मासूम-निर्दोष भक्त मेक इन इंडिया-मेक इंडिया वाला गाना सुनाते है दिनभर।  रियली सर वी आर टोटली कंफ्यूज, टोटली फेडअप कुछ इसपर भी बोलने की कोशिश कीजिये।

एक अन्दर की बात बताऊ जब से ये चाइना के विरोध में लोगों ने मोर्चा निकाल जगह-जगह बॉयकट चाइनीस प्रोडक्ट का स्टीकर चिपकाना शुरू किया है न तब से चीनी कम्पनियां इस धंधे में भी कूद पड़ी है, कि बॉयकट चाइनीस प्रोडक्ट के स्टीकर बनाकर भारत भेजो बहुत मांग है इसकी भी। हमारे माल बाकि के साथ-साथ अब ये भी खूब बिक रहा है।

चाइना पकिस्तान का हो गया अब देश के अन्दर के मुद्दे :
सुना है कि वो आर्थिक सर्वेक्षण की कोई रिपोर्ट बनाई है आप लोगों ने दुबारा से, ये जानने के लिए की नोटबंदी, जी एस टी का के क्या क्या फायदे हुए। वैसे पता ऐसा भीं पहली बार हो रहा है की एक साल में या फिर यूँ कहे कि 6 महीने के भीतर दो बार आर्थिक सर्वेक्षण करवाया गया हो। खैर आपकी सरकार हर महीने करवा लीजिए मेरा क्या।
मगर उसमे जो निकल के आया वो आपके उन दूरगामी परिणामों से दूर-दूर तक कहीं मेल खता नहीं दिख रहा, ऐसा क्यों? आपके तो बहुत से विद्वानों ने कहा था कि नोटबंदी के दूरगामी परिणाम बहुत अच्छे होंगे फिर ये तो अभी से ही लड़खड़ाने लगे। पहले जेटली जी ने कहा था कि विकास दर 7.5 प्रतिशत रहेगी अब बोल रहे है मुश्किल है। उधर जुलाई में आये (आई आई पी) के आकड़े भी बेहतर नहीं आये ऐसा क्यों? आई एम एफ की खबर भी साथ नहीं दे रही, कुछ कीजिये। पिछले दिनों वो भी बोल गए कि विकास दर घटने वाली है। नहीं-नहीं वो विकास तो चंडीगढ़ में है जेल में बंद वो नहीं, विकास दर. काइंडली डोंट गेट कंफ्यूज।


अब थोड़े से टिप्स भी ले लीजिए :
वो क्या है न कि पिछले दिनों हमारे देश के पार्ट टाइम रक्षा मंत्री केरला गए थे।  सुना है उधर बतेरे संघ कार्यकर्त्ता मारे गए लाल झंडे वालों के हाथों। अफ़सोस ! खैर मानवाधिकार के मसलों से जुडी कुछ रिपोर्ट्स तो ये भी बताती है कि जितने संघी मरे लगभग उतने ही लाल झंडे वाले भी मरे। वेल मेरा टेंशन ये नहीं है कि संघी मरे या सी पी एम वाले। मेरा कंसर्न वो जो देश के लिए घर द्वार छोड़ सियाचिन में अपनी हड्डी गला रहे है न उनसे है। सच में धन्य है माँ के वो लाल। सुना है ठण्ड से हाथ-पैर खराब हो जाते है वहां ड्यूटी करने वालों के। जेटली जी को बोलिए कभी उनके भी घर हो आये जब लिपट के आते है वो तिरेंगे में, बहुत बुरा लगता है। हैं मेरे भी कुछ दोस्त फौज में सोचता हूँ तो डर लगता है। भेजिए जेटली जी को कभी उनके भी घर उनके बूढ़े माँ-बाप बेवा बीवी बच्चों से मिलने।


अब बात करते है गोरखपुर की क्या हुआ आपने ट्वीट नहीं किया अभी तक???? पिछली बार आपके 10-12 ट्वीट देखे थे जब नितीश कुमार की अंतरआत्मा ने करवट ली थी। आपकी आत्मा नहीं कचोट रही आपको? बांग्लादेश में लोग बाढ़ से मरे या फिर मेंचेस्टर में बम फटे तो आप दुखी हो जाते है गोरखपुर तो इधर ही है अपने दिल्ली से चंद सौ किलोमीटर दूर। तो फिर कुछ बोलिए लेट से ही बोल दीजिए, कह दीजिएगा मित्रो समय पर ट्वीट नहीं कर पाया इंटरनेट का बिल जमा नहीं कर पाया था इसलिए अम्बानी ने लाइन काट दी थी। हम मान लेंगे मगर बोलिए ज़रूर। 

धन्यबाद :     



  





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