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क्योंकि रोटी बड़ी मुश्किल से मिलती है!

कुछ दिनों पहले ये नजारा नोएडा सैक्टर सोलहा में देखने को मिला था। जरा सोचिए, जब कभी हमारें घरों के छोटे बच्चे ऐसी कोई उछल कूद करते है तब डर के मारे हमारी जान निकल जाती है। वहीं उस सबके उल्ट तकरीबन बारह-चैदह फिट की उॅंचाई पर चेहरे पर नकाब ढककर करतब दिखाती ये 10-11 साल की बच्ची और नीचे सड़क पर ढोल बजाकर लोगो को अपनी और आकर्षित करता उसका भाई और मां!

तब ये शेर यादा कि

!! हुनर सडकों पे तमाशा करता है
और किस्मत महलों में राज !!

!!जो दिया तुने बहुत दिया ए जिंदगी
बहुतों को तो ये भी नसीब नहीं होता!!

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शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

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