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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हमसे तो नै हो पाएगा भईया, तुम्हीं जला लो अपने अन्दर के रावण को।

राम रहीम , आशाराम , फलहारी बाबा को पूजों जो स्त्रियों को अपनी गुफाओं में ले जाकर मर्यादा लांघते है। और सालों अपनी अशोक वाटिका में सीता को सुरक्षित रखने वाले रावण को जलाओं अपनी बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने वाले का तिरस्कार करों और धोबी की बातों से उत्पन्न संशय के लिए गर्भवती पत्नी को छोड़ने वाले को मर्यादा पुरषोतम बताओं। बेटियों पर लाठी-डंडे बरसाओ, कोई सवाल करें तो रंडी बताओं।जला तेजाब से उनके चहरे अपनी भड़ास मिटाओं। वाह रे रामवालों। 

महमूद- एक हरफनमौला कलाकार, किंग ऑफ़ कॉमेडी

“दे अल्लाह के नाम पर दे दे दीनार नहीं तो डॉलर चलेगा डॉलर नहीं तो शर्ट का कॉलर चलेगा” महमूद साहब किसके चहेते नहीं थे, एक ऐसा कलाकार जिसने अपने जीवन में कई उतार - चढ़ाव देखे मगर हँसते हंसाते रहे । हरफनमौला कलाकार कभी एक्टर तो कभी निर्देशक कभी गायक और जबरदस्त कॉमेडियन तो वे थे ही ।  आज उनका जन्मदिन है जानिये महमूद के जीवन कुछ अनकहे किस्सों के बारे में, जानिये क्यों अंतिम दिनों में अमिताभ बच्चन से बेहद खफा रहे महमूद और उन कलाकारों के बारे में जिनमें महमूद के साथ काम करते वक़्त अन्दर एक डर होता था ।  अपने रोल के कट जाने का, चिढ़ थी की ये अब हमसे भी ज्यादा पैसा लेने लगा है- सन 1932 में जाने–माने कलाकार और डांसर मुमताज़ अली एवं लतिफुनिसा की आंठवी संतान के रूप में महमूद का जन्म माया नगरी मुंबई में हुआ था । महमूद के पिता मुमताज़ अली 40-50 के दशक के जाने माने नृत्य कलाकार थे , उनकी बहन मीनू मुमताज़ भी एक सफल नृत्यांगना एवं अदाकार रही । अंडे से लेकर मुर्गी के चूजे तक बेचे- महमूद के एक्टिंग करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट बोम्बे टाकिस्ज़ की फिल्म ‘ किस्मत ’ से हुई थी । महमूद यह

ये घोड़ा आपका है इसके इस्तेमाल से मत डरिये

दोस्तों अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि इंसान अपनी पसंद के जरूरत के बहुत से काम सिर्फ ये सोचकर नहीं करता कि दुनिया क्या सोचेगी ,  पास-पड़ोस के लोग क्या कहेंगे। दरअसल अपने दैनिक जीवन में    हम   जितने तरह के लोगों से मिलते है उन सबके विचार हमारे प्रति अलग-अलग होते है। इन्हीं पराये विचारों के दबाव में आकर हम अपना आत्मविश्वास खो देते है , और न चाहते हुए भी गलत निर्णय ले लेते है। आज की ये कहानी ऐसे ही पिता-पुत्र के सफर से जुड़ी हुई है जहां दोनों पिता-पुत्र अनजाने लोगों की बातों में आकर बेवजह अपने सफर का आनंद गवां देते है। एक बार पिता-पुत्र का एक जोड़ा व्यापार के सिलसिले में अपने   एक पालतू घोड़े पर सवार होकर घर से निकलता है। रास्ते में वे दोनों कई अनजान शहरों से गुजरते है। मार्ग में जब वे चाय-नाश्तें के लिए एक   अनजान नगर में रूकते है तो एक अपरिचित व्यक्ति उन्हें टोक कर कहता है कि “ भाई आप कैसे कठोर लोग है। एक बेचारे बेज़ुबान जानवर पर दो-दो लोग सवार है ये भी भला कोई बात हुई , शर्म करो। “ उसकी बातों से वे दोनों पिता-पुत्र स्वयं को दोषी मानकर फटाफट घोड़े से उतर जाते है। उसके बाद अपने

बिना मिनिमम बैलेंस की शर्त के कैसे खुलवाए एस बी आई में अपना खाता

नोटबंदी की मार झेल रहे छोटे मझोले कारोबारी एवं परिवारों को इस साल दूसरा जो सबसे बड़ा झटका लगा, वो था देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एस बी आई द्वारा ग्राहकों के खाते पर  मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त एवं  ए टी एम से निकासी एवं अन्य इस्तेमाल की सीमा पर भी भारी चार्ज एवं टैक्स लगाना ।   आपको बता दें की देश के इस सबसे बड़े सरकारी बैंक के खाताधारियों की संख्या 31 करोड़ से अधिक है ।   ऐसे में कई लोग जो इस प्रकार के नियमों से खासे नाराज़ है उन्हें ये भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करे? क्या वो एस बी आई का खाता बंद कर किसी और बैंक में खता खुलवा लें ।  या फिर बेंकिंग सेवा से ही तौबा कर ले क्योंकि क्या पता जो शर्ते अभी एस बी आई ने लगाई है कल को वो बाकि अन्य बैंक भी लगाने लग जाए तो ग्राहक कहाँ जाए ।  हालाँकि उड़ते-उड़ाते खबर ये है की एस बी आई अपने मिनिमम बैलेंस रखने के निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे दौबारा परिवर्तित कर सकता है ।  मगर अभी ये खबर सिर्फ एक संभावना भर ही है ।  ऐसे में एक एस बी आई बैंक के ग्राहक के पास ऐसे कौन से विकल्प बचते है जिससे वो अपने बैंक के ग्राहक भी बने रहे एवं मिनिमम बैलेंस वाली शर्त स

जीवन ठेला गाड़ी.................

कुछ वक्त पहले यहीं पैसेफिक माॅल के पास इनका घर था। एक झोपड़ी थी, गैरकानूनी झोपड़ी। उसे एमसीडी वालों ने उजाड़ दिया। अब ये यहीं पास के डिवाइडर के अंदर खाली पड़ी जमीन पर रहते है। खुले आसमान के नीचे बीच सड़क पर। बाप-भाई इसी ठेला गाड़ी को चलाते है आज ये  ठेला गाड़ी इनके पानी ढोने-नहाने का ठिकाना बन गया।