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हमसे तो नै हो पाएगा भईया, तुम्हीं जला लो अपने अन्दर के रावण को।

राम रहीम,आशाराम,फलहारी बाबा को पूजों जो स्त्रियों को अपनी गुफाओं में ले जाकर मर्यादा लांघते है। और सालों अपनी अशोक वाटिका में सीता को सुरक्षित रखने वाले रावण को जलाओं अपनी बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने वाले का तिरस्कार करों और धोबी की बातों से उत्पन्न संशय के लिए गर्भवती पत्नी को छोड़ने वाले को मर्यादा पुरषोतम बताओं। बेटियों पर लाठी-डंडे बरसाओ, कोई सवाल करें तो रंडी बताओं।जला तेजाब से उनके चहरे अपनी भड़ास मिटाओं। वाह रे रामवालों। 

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राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

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ऐसे में जब साल2020की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।
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...इसलिए भारत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर छा रहें हैं मंदी के बादल !

भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल पिछले कुछ महीनों से स्पष्ट रूप से आने वाली मंदी के संकेत दे रही है। हालांकि अर्थव्यवस्था के जानकारों को ये दबाव एक के बाद एक किये गए नोटबंदी और जीएसटी के प्रयोग के तुरंत बाद से ही समझ आने लगा था। मगर केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये के कारण इसका कोई ठोस हल नहीं निकल पाया। मेरे अपने शहर जमशेदपुर जहां एशिया की सबसे विशाल(Adityapur IndustrialAreaDevelopment Authority - AIADA Jharkhand India). में स्थित 1100 छोटी-बड़ी फैक्टरियां इस मंदी की शुरूआती भेंट चढ़ चुकी हैं
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