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रिर्पोटर- बताए आपको कैसा महसूस हो रहा है?

हालांकि ऐसी शर्मसार कर देने वाली मीडिया रिर्पोटिंग की घटना न पहली बार हुई है न ही अकेले ऐसी घटनाएं सिर्फ भारत में हुई है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान से लेकर दुनिया में अपनी बादशाहत कायम कर चुके अमेरिका एवं ब्रिटेन में भी इस प्रकार की बचकाना हरकतों वाली तीसरे दर्जे की रिर्पोटिंग कई बार कई पत्रकारों द्वारा की गई है। वही उनके मीडिया संस्थानों द्वारा बिना अपने विवेक के इस्तेमाल के बड़ी ही जल्दबाजी में इस प्रकार की खबरें प्रकाशित-प्रसारित भी की गई है। मगर इन सब के बीच सीधा एवं साधारण सवाल जो हर बार पीछे छूट जाता है, वो ये है कि कब हमारा मीडिया ऐसे मामलों की संवेदनशीलता को समझते हुए रिर्पोटिंग करना सीखेगा?
मीडिया पर हावी ‘सबसे पहले सबसे तेज खबरें‘ दर्शेकों तक पहुंचाने की होड में होने वाली भयंकर गलतियों ने एक तरफ जहां इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाया है वहीं कई मीडिया संस्थानों की कार्यशैली एवं उनकी ग्राउंड रिर्पोटिंग को हंसी का पात्र बनने से नहीं छोड़ा। वहीं कई मामलों की रिर्पोटिंग तो शायद इसलिए भी आपत्तिजनक मानी गई क्योंकि वो देश की सुरक्षा के लिए खतरा एवं आपसी भाईचारे को बिगाड़ने वाली रह…

ऐसी ख़ुशी देखी है कहीं ?

ये बच्चे मुझे ऑफिस आते हुए सेक्टर 16 के मेट्रो स्टेशन के बाहर एक पान की दुकान पर दिख गए। किसी के माँ-बाप पान,सिगरेट बेचते है तो किसी बूट पोलिश करते है। वो दिन भर अपने इन नौनिहालों को ऐसे ही सड़कों पर बिना किसी डर के आज़ाद छोड़ रहते है। एक हमलोग है अगर बच्चा जरा भी मिटटी में खेल ले तो फटा-फट उन्हें नेहला-धुला के साफ़ करते है। हाईजीन, साफ़-सफाई ज़रूरी है कहीं इन्फेक्शन न हो जाए. बीमार न पड़ जाए। एक ये है मस्तमौले ग़ुरबत की ज़िन्दगी में आधे पेट खाए असली हंसी बिखेरते। यकीन मानिये कभी किसी झोपड़ पट्टी में किसी गरीबों की बस्ती में जाइए वहां आपको ज़्यादातर बच्चे भूखे मिलेंगे मगर ज़िन्दगी से डरे एवं रोते नहीं मिलेंगे।

कद में छोटे मगर शख्सियत में सबसे ऊँचे शास्त्री जी

आज देश के तीसरे और मेरे सबसे प्रिय प्रधानमंत्री, राजनेता लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन है। वो प्रधानमंत्री जिसने सच में जिसने ‘सादा जीवन उच्च विचार‘ के नारे को देश के सबसे बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी नहीं छोड़ा। तकरीबन 5 फुट का कद और मात्र 39 किलो का वजन मगर जज्बा ऐसा कि 56 इंच की छाती वाले भी शर्मिदा हो जाए। आइये जानते है शास्त्री जी के जीवन दरअसल सादे जीवन के कुछ यादगार सुने-अनसुने किस्सों के बारे में-
2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराए में स्कूल शिक्षक शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहां हुआ था उनके पिता एक सरकारी शिक्षक और मां एक सामान्य गृहणी थी। बाद में उनके पिता का हस्तांतरण राजस्व विभाग इलाहाबाद में क्लर्क के पद पर कर दिया गया। शास्त्री जी जब मात्र 18 महीने के थे तब ही अप्रैल 1906 में उनके पिता का प्लेग के कारण स्वर्गवास हो गया। इसके बाद वे अपनी मां रामदुलारी एवं एक बहन के साथ रहने के लिए अपने नाना हजारी लाल के गांव रामनगर चले गए। मगर दो साल बाद साल 2008 में नाना की मृत्यु के बाद उनका जीवन और कठिन हो गया। पालन-पोषण की पूरी जिम्मेवारी मामा दरबारी लाल पर आन पड़ी।
पूरी रात म…