सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ऐसे बचें जीएसटी के फ्रॉड से

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आम आदमी को राहत पहुँचाने के लिए कुल 200 सामानों के ऊपर से जीएसटी की दर को घटा दिया है। मगर देश के कई छोटे-बड़े शहरों में व्यापारियों द्वारा लोगों को इसका लाभ सही से नहीं दिया जा रहा। कई जगहों से ऐसी शिकायते मिलने को आ रही है कि अब भी दुकानदारों द्वारा उपभोगता से पुरानी दर ही वसूली जा रही है। जिसके मुख्यता दो कारण है। पहला हर किसी को न तो वो पूरी लिस्ट  पता है जिसमें घटाए गई दरें एवं सामान की जानकारी दी गयी है, न ही ये पता है कि ऐसे फर्जीवाड़े की शिकायत किससे एवं कैसे करें।

ब्लॉग में पढ़िए की कैसे आप इस प्रकार के फर्जीवाड़े की शिकायत कर सकते है एवं एवं कहां से आप वो अधिकारिक लिस्ट प्राप्त कर चेक कर सकते है, जिसमें सभी सामानों के नाम एवं जीएसटी की नई दरों की लिस्ट उपलब्ध है।  
आपको बता दें कि इस मामले में होटलों एवं रेस्टोरेंट्स को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही है। ऐसा सुनने में आ रहा है की देश के कई शहरों में स्थित होटल्स एवं रेस्टोरेंट्स अभी भी जी एस टी की पुरानी दर ही अपने मेहमानों से वसूल रहे है। जबकि नई दरों में इन दोनों कारबार में जीएसटी की दर में कटौती की गई है। अगर आप के साथ भी ऐसी कोई घटना होती है तब आप भी नीचे बताए तरीकों से अपनी शिकायत सम्बंधित विभाग से कर सकते है।
ईमेल द्वारा-

ईमेल द्वारा अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए आपको अपनी शिकायत का पूरा ब्यौरा cbecmitrahelpdesk@icegategovin पर भेजना होगा। ईमेल में आपको अपनी जानकारी रेस्टोरेंट /होटल का नाम एवं वसूले गए बिल की स्कैन कॉपी भेजनी है। अगर आपने ऑनलाइन फ़ूड आर्डर किये थे तब आप अपने सर्विस प्रोवाइडर एप्प के बारे में भी विस्तार से ईमेल में लिखे।

ऑनलाइन फॉर्म भरें-

अगर आप को ईमेल करना कठिन लगता है तब आप cbec-gstgovin पर क्लिक कर raise web ticket का विकल्प चुने। इस पर क्लिक करते ही एक नया पेज tax/fraude avoidace आपके सामने उभर आएगा। यहाँ उपलब्ध फार्म में अपनी डिटेल्स भरें एवं रिपोर्ट बॉक्स में लेन-देन का पूरा ब्यौरा विस्तार से लिखें।

कॉल कर दर्ज करवाए शिकायत-

आप cbec के टोल फ्री नंबर 18001200232 पर कॉल कर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। कॉल पर फ्रॉड डिपार्टमेंट का विकल्प चुनकर अपनी शिकायत विस्तार से दर्ज करवा सकते है।

एप्प डाउनलोड कर रहें अपडेटेड-


ऐसा नहीं है कि भविष्य में सरकार जी एस टी की दरों में बढ़ोतरी या और कटौती नहीं करेगी। इसके लिए अच्छा है कि अगर आप का भी पाला आये दिन उन सामानों से पड़ता है जहां जी एस टी की बदलती दर जानना आपके लिए बेहद ज़रूरी है  तो आप सरकार द्वारा बनाए गए जी एस टी रेट फाइंडर एप्प को अपने स्मार्ट फोन में डाउनलोड कर अपडेटेड रह सकते है।
https://playgooglecom/store/apps/details?id=ingovcbecgsttaxratemanual&hl=en

ऑफलाइन भी इस्तेमाल करें 
ये एप्प आपको सभी सामानों एवं सेवाओं पर लगने वाली जी एस  टी की दर को कुछ ही क्लिक पर जानने की सुविधा देता है। जीएसटी की दर में होने वाले किसी भी फर्जीवाड़े से बचाने वाला इस एप्प को आप ऑफलाइन भी इस्तेमाल कर सकते है।       
     
यहाँ पता करे जीएसटी की दरों के बारे में-

आप दी जा रही वेबसाइट https://cbec-gstgovin/gst-goods-services-rateshtml के द्वारा किस सामान या सेवा पर कितने प्रतिशत जीएसटी की सही दर का पता कर सकते है।       


टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राखोश- भारत की पहली पीओवी तकनीक आधारित साइकोलॉजिकल थ्रिलर!

तकनीक के इस्तेमाल के मामले में वैसे तो भारतीय सिनेमा हॉलीवुड से अभी बहुत पीछे माना जाता है। लेकिन अब शायद वो दौर शुरू हो गया है जब भारतीय फ़िल्म निर्माता/निर्देशकों ने फ़िल्म निर्माण में कहानी और संगीत के अलावा इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

शायद ये इसी का नतीजा है कि देश में पहली बार और विश्व सिनेमा के इतिहास में दूसरी बार पीओवी तकनीक का इस्तेमाल कर एक फ़िल्म का सफ़लतापूर्वक निर्माण किया गया है।



क्या है ये पीओवी तकनीक?

पीओवी का मतलब होता है (पॉइंट ऑफ़ व्यू- नज़रिया)। आपने अक्सर फ़िल्मों में किसी ख़ास किरदार के नज़रिए को लेकर फरमाए गए कुछ ख़ास सीन्स या डायलॉग देखे होंगे। लेकिन यदि एक पूरी की पूरी फ़िल्म ही किसी ख़ास क़िरदार के नज़रिए से बना दी जाए, तो क्या कहने!

दरअसल यहाँ सिर्फ़ ये बात ख़ास नहीं है कि एक किरदार विशेष को पूरी कहानी में तवज्जों दी गई है। बल्कि इस फ़िल्म की ख़ासियत ये है कि फ़िल्म का मुख्य कलाकार कोई और नहीं बल्कि फ़िल्म का कैमरा है। जो फ़िल्म के मुख्य किरदार का रोल निभाता है जिसके इर्द-गिर्द फ़िल्म की कहानी घूमती है।

दर्शक इस मुख्य किरदार को देख तो नहीं …

क्या थीं इन अपराधियों की अंतिम इच्छा, यहाँ पढ़ें!

भारत सहित दुनिया के कई देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान आज भी मौजूद है। हालाँकि भारत में फांसी की सज़ा'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधियों को ही दी जाती है। इस कठोर सज़ा के एक बार पक्के हो जाने के बाद ऐसी कई प्रक्रियाएँ होती हैं जिनसे जेल मेन्युअल के तहत हर मुज़रिम को गुज़ारना पड़ता है। ऐसी ही एक ख़ास प्रक्रिया होती है मुज़रिम की अंतिम इच्छा जानने की। जिसे जेल मेन्युअल के तहत मानवीय आधार पर हर मरने वाले से पूछा जाता है और फिर अधिकारी उस पर निर्णय लेते हैं कि क्या अपराधी की अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है या नहीं?


ऐसे में जब साल2020की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।
माइकल नेय- नेपोलियन की सेना के इस बहादुर कमांडर ने अपनी मौत से पह…

हंगामा क्यों है बरपा, पूछताछ ही तो की है ?

अर्णव गोस्वामी के अलावा भी पूरे देश में ऐसे सैकड़ों पत्रकार हैं जो अपना काम बड़ी मेहनत और ईमानदारी से करते हैं। हाँ ये अलग बात है कि वो इतने रसूखदार नहीं हैं कि किसी नेता, मंत्री या राजनीतिक दल या देश की मीडिया ये मठाधीशों को उनकी चिंता हो। ताज़ा उदहारण के तौर पर याद कीजिये उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के सामान्य से पत्रकार पवन जायसवाल को, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा इसलिए प्रताड़ित किया गया, उसपर मुकदमा कर दिया गया। क्योंकि उसने अपनी एक ग्राउंड रिपोर्ट में मिडडे मील के नाम पर सरकारी स्कूल के बच्चों को नामक रोटी परोसने की घटना को उजागर किया था। न कि स्टूडियो में बैठकर कोरे आरोप लगाए थे। ऐसी स्पष्ट और साहसिक पत्रकारिकता करने वाले मीडियाकर्मी के लिए क्या किसी बड़े पत्रकार ने, मीडिया के मठाधीश ने इंसाफ दिलाने के लिए कोई पहल की ?

ऐसे में अर्णव गोस्वामी का पक्ष लेने वाले पत्रकारों, नेताओं आदि को ये याद रखना चाहिए कि, अर्णव पूरे भारतीय मीडिया या भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि नहीं है। साथ ही वर्तमान में वो एक बड़े मीडिया हाउस के मालिक भी हैं इसलिए इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि उनका इन्ट्रे…