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जनवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

खोजी पत्रकार ने किया अपनी ही रसोई की भूतनी का स्टिंग ऑपरेशन !

एक खोजी पत्रकार जिसे कई घोटालेबाजों के स्टिंग ऑपरेशन करने का तजुर्बा हासिल था। उसने दिल्ली-एनसीआर में एक नया फ्लैट खरीदा। सारा परिवार खुशी-खुशी वहां शिफ्ट हो गया। कुछ दिन सबकुछ बहुत अच्छे से चला। फिर उस फ़्लैट में एक अजीबों-गरीब परेशानी उत्त्पन्न हो गई। पत्रकार की पत्नी रात को सोने से पहले अपने रसोईघर को अच्छी तरह से धो-पोछकर, फ्रिज लाइट का बटन, वाशबेसिन का नल, आदि बंद करके सोती। मगर अक्सर सुबह उसके रसोई के वाशबेसिन का नल खुला मिलता, टंकी का सारा पानी भी खत्म हो गया होता। पत्रकार   ने प्लम्बर को बुलवाया ऊपर से नीचे तक का सारा कनेक्शन चेक करवाया। मगर कहीं कुछ समझ नहीं आया। थोड़े दिन यूं ही पार करने के बाद किसी पड़ोसी ने बातचीत के दौरान पत्रकार की पत्नी को बताया कि आपसे पहले जो लोग यहां रहते थे उन साहब की पत्नी को खाने - पकाने के बड़ा शौक था। मगर किसी आपसी झगड़े से परेशान होकर उसने इसी फ़्लैट में आत्महत्या कर ली। हो न हो ये उसी की आत्मा का काम है। उसके बाद उनके पति ने ये फ़्लैट बेच दिया और किसी और शहर में चले गए। उस पड़ोस की बातों की अनुसार पत्रकार की पत्नी ने बिना सोचे समझे मा

तो क्या ऐसे खत्म होगा भ्रष्ट्राचार , कालाधन ?

जिन्हे लगता है कि मौजूदा केंद्र सरकार आज़ाद भारत कि सबसे ईमानदार सरकार है और प्रधानमन्त्री मोदी पर तो आप चवन्नी कि हेराफेरी का आरोप लगाने का दुस्साहस भी नहीं कर सकते , वो ज़रूर पढ़ें।   भारतीय राजनीति में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के लिए कई नियमों में से एक नियम हैं/था कि यदि कोई भी राजनीतिक दल 20000 से ज़्यादा का चंदा अपने किसी भी शुभचिंतक से लेता है तो राजनीतिक दल को उस शुभचिंतक का नाम सार्वजानिक करना पड़ता था/है। मगर नेहरू के वक़्त से लेकर अटल बिहार से होते हुए देश के सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री मोदी जी तक हर राजनीतिक दल ने , सरकार ने ज़्यादातर दानकर्ताओं से प्राप्त चंदे को हमेशा 20000 से कम बताया। यानी कि जमकर काली कमाई में हिस्सेदारी ली।  इसी प्रकार आरपी एक्ट की धारा 29 सी के तहत अब भी 20,000 रुपये तक का चंदा बिना किसी हिसाब-किताब के लिया जा सकता है. इसलिए राजनीतिक चंदे में जवाबदेही या पारदर्शिता पर भी कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा सनद रहे कि आज के वक़्त में भाजपा देश कि सबसे धनी राजनीतिक पार्टी है जिसे पिछले सालों सबसे ज़्यादा राजनीतिक चंदा मिला है। जिस चंदे के पैसों से प

बुरा साल बीत गया

!! बहुत   सीखाकर,   बहुत   समझाकर बुरा साल बीत गया !! !! तेरा मेरा साथ छुड़ा कर   बुरा साल बीत गया !! !! अपने-पराये की पहचान करा कर बुरा साल बीत गया !! !! रिश्तो की नई परिभाषा बता कर बुरा साल बीत गया !! !! दुनियादारी के नये उसूल सीखा कर बुरा साल बीत गया !! !!   बड़ा तडप़ा कर , बड़ा रुला कर बुरा साल बीत गया !! !! बड़ा थका कर , मुझे हरा कर बुरा साल बीत गया !! !! मृत्यु से मेरा साक्षात्कार करा कर बुरा साल बीत गया !!     !! अनुभव का नया पाठ पढ़ा कर बुरा साल बीत गया !! !! कर्तव्यों का मुझे मेरे बॊध करा कर बुरा साल बीत गया !!