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दम तोड़ रहे नौनिहालों की लाशों पर आयोजित होगा योगा दिवस ?


नेता, मंत्री, बाबा, गुरु मीडिया जिसे देखों योग दिवस की तैयारियों में लीन है। उधर मुजफ्फरपुर में सरकारी लापरवाही से मरने वाले बच्चों का आँकड़ा 150 होने वाला है। वहीं हर बार की तरह इस बार भी योग के नाम पर करोड़ों स्वाहा होंगे, एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। योग को सभी बीमारियों का इलाज बताकर इतिश्री कर ली जाएगी। 
लेकिन, न कोई ये सवाल करेगा न किसी को इसकी जरूरत महसूस होती है कि क्यों न इस बार योग के नाम पर खर्च होने वाले बजट से उन अस्पतालों के इलाज किया जाए जहाँ सुविधाओं की कमी है, जहाँ पलक झपकते ही मासूम बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते दम तोड़ रहें हैं। जहाँ ज़्यादातर बच्चे बीमारी से कम बल्कि बीमारी से लड़ने वाली सुविधाओं की कमी के चलते ज़्यादा मर रहे हैं।

बिहार में ढंग के अस्पताल नहीं हैं गोरखपुर में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं थे गुजरात के सूरत में 30 फिट की सीढ़ी नहीं थीं मगर योगा दिवस के नाम पर फूंकने कर लिए करोड़ों का बजट है। हो सके तो बहिष्कार कीजिए ऐसे दिखावे के दिवस का।बिहार में चमकी बुखार से 2014 में 355 2015 में 225 2016 में 102, 2017 में 54  2018 में 33 2019 में अब तक 138 बच्चों  की मौत हो चुकी है।

गौरतलब है कि हमारे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री 2014 भी देश के स्वास्थ्य मंत्री थें और उस वक़्त भी इन्होंने  मुज़फ्फ़रपुर का दौर इसी बीमारी के संदर्भ में किया था। अपने दौर के तुरंत बाद बतौर स्वास्थ्य  मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कई ऐसी घोषणाएं की थी जिनको अगर अमल में लाया जाता तो शायद आज ये दिन न देखने पड़त। उन्होंने अपनी घोषणाओं में कहा था कि सौ फिसदी बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा साथ ही वहाँ मुजफ्फरपुर में 100 बेड का एक बढ़िया अस्पताल खोला जाएगा। इस पूरे दिखावे के खेल के लिए कई स्तरों की बैठके भी की गई थी। जबकि नतीज़ा सिफ़र हम सबके सामने है।  

ऐसे में केंद्र सरकार बताए कि उसने पिछले पांच सालों में क्या -क्या किया ? साथ ही सूबे के मुख्यमंत्री नितीश कुमार जो इस घटना को ज़्यादा करीब से देख-जान पा रहे थें उन्हें भी बताना चाहिए कि उन्होंने किस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं अपनी जनता को मुहैया करवाई? क्योंकि, ऐसा तो नहीं है कि ये बीमार पहली बार अचानक से फैली हो जिसके लिए सरकार प्रशासन पूरी तरह तैयार न हो ? उनके अपने स्वास्थ्य विबाह के पास इस बीमारी से मरने वाले बच्चों का सालाना आकड़ा मौजूद है मगर अभी तक मुजफ्फरपुर के अस्पताल में पर्याप्त संख्या में थर्मामीटर, दवाइयां एवं अन्य मेडिकल उपकरण नदारद हैं जिसकी पुष्टि वहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने मीडिया के कैमरे पर की है। 

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