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दिल्ली बदली अब देश बदलो लेकिन थोड़ा तरीका भी बदलो !

'आपके लिए समय आ गया है कि केजरीवाल अब सीएम की कुर्सी मनीष सिसोदिया को सौंप कर केंद्र की राजनीति का रुख करें। देश की जनता के हित में काम करने का विचार रखने वाले मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर देश के विकास और उन्नति की नई परिभाषा तय करें।


अरविंद केजरीवाल

बाक़ी गैर भाजपा शासित राज्य जो दिल्ली की तरह शिक्षास्वास्थ्य जैसी लोककल्याणकारी नीतियों को लागू अपने नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे ज़रूरी शर्त सरकारों द्वारा किये जाने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाना है। उसके बाद सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर काबू पाना और उसके बाद उन्हें सर्वप्रथम अपने राज्य की जनता को मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने की ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जो उनके राजस्व के अनुकूल हों और जिन्हें सही मायनों में जनता को डिलेवर किया जा सके। 


दिल्ली सरकार की योजना

क्योंकि अरविंद केजरीवाल की सरकार का राजस्व मुफ्त बिजली-पानी देकर भी सरप्लस में रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया कहा गया है कि वर्ष 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दिल्ली सरकार का राजस्व सरप्लस में रहा है।


सीएजी रिपोर्ट  दिल्ली सरकार

हैरानी की बात ये है कि ये सरप्लस तब है जबकि दिल्ली को केंद्र से मिलने वाला अनुदान घट गया। दिल्ली सरकार को 2016-17 में द्वारा 2, 825 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया था। जबकि 2017-18 में दिल्ली को केंद्र से मात्र 2, 184 करोड़ रुपए का अनुदान ही मिला। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में दिल्ली सरकार ने 5, 236 करोड़ रुपए के रिवेन्यू सरप्लस का लक्ष्य रखा है। जबकि 2018-19 में राज्य सरकार का अनुमानित रिवेन्यू सरप्लस 4, 931 करोड़ रुपए था।

लेकिन फिर भी सिर्फ मुफ्त बांटने वाली योजनाएं हमेशा किसी सरकार या पार्टी के लिए जीत का सबब बने, ये कोई ज़रूरी नहीं। क्योंकि ऐसी योजनाएं मूल रूप से सरकारी खजाने से चलाई जाती हैं और सरकारी खजाना लोगों के टैक्स के पैसों से भरता है। ऐसे में केजरीवाल सरकार सहित बाकी सभी राज्यों की सरकारों के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि वो अपने राज्य के लोगों को नौकरियों और व्यापार के अवसर प्रदान करें। 


सरकारें ऐसे कार्यक्रम चलाएं जिससे भविष्य के लिए रोजगार और उधोग-धंधें का निर्माण विकास हों और उससे टैक्स कि वसूली कर जनकल्याणकारी योजनाओं के खर्च को पूरा किया जा सके। वरना एक समय बाद न सिर्फ ऐसी योजनाओं को न सिर्फ बंद करना पड़ सकता है। बल्कि सरकारी खजाने में भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।  जिससे जनता के बीच एक नकारात्मक संदेश जाता है।


दिल्ली सरकार की योजनाएं

साथ ही  लोककल्याण के नाम पर निशुल्क सेवाएं बांटने से अच्छा होता है कि उनका स्वरुप कुछ इस तरह का बनाया जाए जिससे कि जनता को उसका लाभ दीर्घकाल तक मिलता रहे। जैसे की बढ़िया स्कूल, अस्पताल, कॉलेज का निर्माण कर न कि बिजली और पानी का बिल मुफ्त कर। बिजली पानी जैसी सेवाओं को मुफ्त कि तुलना में सस्ता बना रखना ज्यादा समझदारी वाला निर्णय हो सकता है।  क्योंकि  एक औसतन नागरिक ऐसी सेवाओं को एक समय बाद भूलने लग जाता है कि उसने पिछले पांच दस सालों में बिजली पानी का बिल न देकर कितना धन बचा लिया। लेकिन लगातार सुधरता शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर उसे प्रत्यक्ष रूप से समझ आता है और वह  उसकी खुलकर कद्र करता है और अपनी कमाई से सरकार को टैक्स देने से भी हिचकिचाता नहीं है।क्योंकि वो अपने आस -पास में सरकारी सुविधाओं में हो रहे सुधार को स्पष्ट रूप से देख रहा होता है।  


सरकारी खर्च और सरकारी भ्रष्टाचार के मामले में भी यही फार्मूला काम करता है जब आम नागरिक का अनुभव बदलता है जब उसके सरकारी काम बिना किसी देर के बिना किसी घूस के आसानी से पूरे हो जाते हैं। वहीँ आज के शिक्षित होते समाज में सरकारों द्वारा जनता के पैसों के दुरुप्रयोग को भी छिपा पाना किसी सरकार के लिए आसान बात नहीं है। ऐसे में जनता  उस खर्च को कम से कम कर राजस्व में वृद्धि कि जा सकती है और जनता को विशवास में लिया जा सकता है कि सरकार आपके पैसों का सही इस्तेमाल करती है।   

जहाँ तक रही बात उन लोगों की जो मुफ़्त बिजली पानी की सुविधाओं को लेकर पूरी दिल्ली की जनता को मुफ्तखोर बताकर आलोचना कर रहें हैं। उन्हें पहले वह सभी सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए जिनके लिए केंद्र सरकार करोड़ों रूपये स्वाह कर चुकी है। साथ ही भाजपा ने जनता को लुभाने के लिए किस तरह के वादे अपने संकल्प पत्र में किये थें उन्हें ज़रूर पढ़ना जानना चाहिए।  


दिल्ली भाजपा का संकल्प पत्र 2020

उनके लिए संदेश ये है कि कम से कम अब से ही अपनी राज्य सरकार के कार्यकलापों पर नज़र रखना शुरू कर दें। इस बात पर ध्यान दें कि आपके दिए टैक्स के पैसों का आपकी राज्य सरकार कहाँ इस्तेमाल करती है। कहीं आपके राज्य के मुख्यमंत्री ने अपने लिए 191 करोड़ का एयरक्राफ्ट तो नहीं खरीद लिया। या फिर विधायकों मंत्रियों के बंगलों की मरम्मत में करोड़ों तो नहीं फूंक रहा, या फिर राज्य में निवेश को आकर्षित करने के नाम पर आपके दिए टैक्स के पैसों को मौज-मस्ती वाले मेलों जैसे कि मोमेंटम झारखंड में तो बर्बाद तो नहीं कर दिया।


गुजरात सरकार

कहीं वह आपके टैक्स की गाढ़ी कमाई को सैफई महोत्सव या दीपोउत्सव या पार्क और मूर्तियों के निर्माण के नाम पर बर्बाद तो नहीं कर रहे हैंया अपने मंत्रियों के लिए फार्च्यून कारें तो नहीं खरीद रहा पता लगाइए।


मोमेंटम झारखंड

डाटा उठाकर देखें कि पिछले पाँच सालों में आपके राज्य में कितने सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग बनीअस्पतालों में दवा, डॉ, जांच विभाग की क्या स्थिति हैनौजवानों की नौकरियों को लेकर राज्य सरकार के पास क्या प्लान हैंमतलब कि क्या आपकी राज्य सरकार किसी भी सूरत में आपको आपके दिए टैक्स का लाभ वापस दे रही है या नहीं। मुफ़्त न सही सस्ती बिजली ज़रूरत के मुताबिक पानीसरकारी अस्पतालों में डॉ और दवाईयों की सुविधाएँ।
 उच्च शिक्षा योजना दिल्ली सरकार


सरकारी स्कूलों में ऐसे शिक्षक जो स्वयं शिक्षित हों। न कि उन राज्यों के शिक्षकों की तरह जो संडे मंडे की स्पेल्लिंग से भी अनभिज्ञ हैं। या फिर जिन्हें देश के प्रधानमंत्री और अपने राज्य के मुख्यमंत्री का नाम भी न पता हो। 
  


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