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खुद से प्यार करना भी है बेहद ज़रूरी…

खुद को प्यार करना हमारे जीवन की संजीवनी है। इसके बाद ही आप खुले दिल से किसी और को प्यार करने में सक्षम हो पाएंगी। हम दूसरों से तो आसानी से प्यार कर लेते हैं लेकिन शीशे के सामने खड़े होने पर जो चेहरा हमारी ओर ताकता है उसे प्यार करना आसान नहीं। हम यह भी जानते हैं कि हमें खुद से मोहब्बत करनी चाहिए लेकिन अक़्सर हम ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाते



खुद से प्यार करना

कई लोग होते हैं जो खुद को बिल्कुल बेकार समझते हैं। उन्हें यही लगता है कि उनसे कुछ नहीं हो पाएगा। कुछ गलत हो जाए तो वो खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनके मन में खुद के लिए इतनी नकारात्मकता इसलिए है, क्योंकि वो खुद से प्यार नहीं करते हैं।


खुद से प्यार कैसे करें और कितना ज़रूरी है बता रहे हैं रेकी ग्रांड मास्टर कैलाश रोहिडा। मुझसे लोग प्यार नहीं करते, क्योंकि मैं सुंदर नहीं दिखते, मेरा रंग काला है... इस तरह की बातों से हमेशा खुद को कम आंकना या हर समय अपनी आलोचना करना बताता है कि आप स्वयं को प्यार नहीं करते इस तरह की आलोचना करके आप अपनी कमी को ही उजागर नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने मनोबल को कमजोर कर रही हैं और अपनी सोच में नकारात्मकता को बढ़ावा दे रहे हैं

कैलाश रोहिडा

यह जानना ज़रूरी है कि जब तक हम खुद से मोहब्बत नहीं करेंगे तब तक हम दूसरों से भी प्यार नहीं कर सकते। यदि कार्यक्षेत्र या शिक्षा के क्षेत्र में प्रदर्शन की बात करें तो अपनी काबिलियत पर विश्वास रखना आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। जब आप सोचते हैं कि यह काम मेरे लिए कठिन है या मुझमें इसे करने की खूबियां नहीं है तो आप फेल हो जाते हैं। लेकिन जब आप खुद से प्यार करते हैं तो आप अपने बारे में सकारात्मक विचार रखते हैं। इस स्थिति में हर चुनौती आपको आत्मविश्वास से भर देती है और आप उसे पार पा जाते हैं। जब आप खुद से सहानुभूति रखते हैं तो आप किसी हार के लिए खुद को नहीं कोसते हैं।



आप समझने लगते हैं कि हारना या गिरना सफर का हिस्सा होता है। आप इस हार से सीख लेकर आगे बढ़ते हैं। ऐसा करने से एक असफलता के बाद आप में सुधार होता है और अगली बार आप दोगुनी सफलता हासिल कर पाते हैं।अगर आप अपनी मौजूदा स्थिति पर गौर करेंगे तो पांएगे कि आप किसी गलत परिस्थिति की वजह से नहीं बल्कि उस परिस्थिति को गलत तरीके से डील करने की वजह से ज्यादा परेशान है। सकारत्मकता हमेशा तनाव को कम करने में सहायक होती है। अगर वैज्ञानिक भाषा में बात करें तो जब आप खुद की आलोचना करते हैं तो आपके शरीर से तनाव को बढ़ाने वाले हार्मोन्स निकलते हैं। जबकि सकारात्मक विचार रखने से खुशी उत्पन्न करने वाले हार्मोन्स निकलते हैं।

सकारात्मक विचार

दुनिया में सुंदर लोगों की कमी नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी तुलना उनसे करें। सुंदरता के मायने केवल शारीरिक सुंदरता ही नहीं होता, इसमें आपकी स्मार्टनेस, जानकारी, सोच वगैरह कई चीजें होती हैं। अपने व्यक्तित्व में संतुलन लाएं। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। किसी को अपना आदर्श जरूर बनाएं, मगर दूसरों की नकल करने की बजाय अपनी एक अलग पहचान बनाएं।

सुबह उठते ही दूसरों से तो ‘गुडमॉर्निंग’ बोलते होंगे, पर क्या कभी खुद को ‘गुडमॉर्निंग’ बोला है! ऐसा तो कभी नहीं हुआ होगा। थके हुए मन से दिन की शुरुआत करने का मतलब अपनी ऊर्जा को कम करना है। ऐसे में कुछ नया करने के बारे में कैसे सोच सकती हैं? तो खुद को रिचार्ज इस तरह करें कि सुबह जब आईना देखें तो चेहरे पर मुस्कान लेकर अपने लिए भी ‘गुडमॉर्निंग’ बोलें, मानो आज आपका दिन सबसे अच्छा है। अपने हर दिन को खास बनाइए।

गुडमॉर्निंग

जो लोग खुद से प्यार करना जानते हैं, वो शारीरिक और मानसिक बीमारियों से भी दूर रहते हैं। ऐसा इसलिए हो पाता है, क्योंकि वे बेहतर स्वास्थ्य के साथ अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाते हैं। ये शरीर आप ही का है। इसका ध्यान रखने की जिम्मेदारी भी आपकी है। समय पर, सही और संतुलित खाना जितना जरूरी आपके घर वालों के लिए है, उतना ही जरूरी आपके लिए भी है। बचा-खुचा खा लेना, जब टाइम मिले तब खाना; अपने साथ ऐसा करते हुए आपको सोचना चाहिए कि आपका शरीर कोई कूड़ादान नहीं है, जिसके अंदर कुछ भी डाल दिया जाए। सेहतमंद खाने से समझौता करके खुद को बीमार न बनाएं।

सेहतमंद खाना


अपने आपको प्यार करना स्वयं के विकास में निवेश करने जैसा है। अपनी भावनाओं, रिश्तों और बाकी व्यावहारिक जिंदगी के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से हीनभावना बढ़ सकती है। कम से कम अपनी जिंदगी की लगाम खुद के हाथ में रखने का गर्व आपके चेहरे पर दमकेगा।

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