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क्या थीं इन अपराधियों की अंतिम इच्छा, यहाँ पढ़ें!

भारत सहित दुनिया के कई देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान आज भी मौजूद है। हालाँकि भारत में फांसी की सज़ा 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयरअपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधियों को ही दी जाती है। इस कठोर सज़ा के एक बार पक्के हो जाने के बाद ऐसी कई प्रक्रियाएँ होती हैं जिनसे जेल मेन्युअल के तहत हर मुज़रिम को गुज़ारना पड़ता है। ऐसी ही एक ख़ास प्रक्रिया होती है मुज़रिम की अंतिम इच्छा जानने की। जिसे जेल मेन्युअल के तहत मानवीय आधार पर हर मरने वाले से पूछा जाता है और फिर अधिकारी उस पर निर्णय लेते हैं कि क्या अपराधी की अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है या नहीं?

Last wish of culprits

ऐसे में जब साल 2020 की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।

माइकल नेय- नेपोलियन की सेना के इस बहादुर कमांडर ने अपनी मौत से पहले अपनी अंतिम इच्छा के तौर परस्वयं ही अपनी मौत का आदेश देने की और आँखों पर पट्टी न बांधने की इच्छा ज़ाहिर की थी। उसके बाद उसने खुद को जिंदा जला देने का आदेश दिया था। वह नेपोलियन की सेना के सर्वाधिक सम्मानित कमांडरों में से एक था। लेकिन वाटरलू की हार के बादउसने धोखे से अपना कब्जा करने की कोशिश की और देशद्रोह की कोशिश का आरोपी पाया गया।

Michael Ney

नाथूराम गोडसे- भारत में भला कौन इस नाम से परिचित नहीं होगामहात्मा गाँधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे को उसके एक साथी नारायण आप्टे के साथ अंबाला जेल में सन 1949 में फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे को जब उसकी फांसी की सज़ा सुनाने के बाद अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने स्वयं को फाँसीघर की जगह जेल परिसर के किसी विशालकाय पेड़ से लटकाकर फांसी देने और बाद में उस टहनी को काट देने की इच्छा जताई थी। ताकि बाद में किसी और को उस टहनी से लटकाकर फांसी न दी जाए। जेल प्रशासन ने उसकी इस इच्छा को पूरा किया। अंबाला सेंट्रल जेल में आज भी विशालकाय पेड़ मौजूद है।

NathuRam Godse

रॉनी ली गार्डनर- नाम के इस अपराधी ने अपनी ज़िन्दगी के अंतिम घंटों को ख़ास बनाने के लिए द लोर्ड ऑफ द रिंग्स ट्रिलॉजी नाम की प्रसिद्ध होलीवुड फ़िल्म को देखने और अंतिम खाने में सटीक लोब्स्टर टेलयानी झींगा मछली की पूंछएप्पल पाई वेनिला आइसक्रीम और 7-अप पीने की इच्छा जताई थी। इस अपराधी पर 2 हत्यों के आरोप थे।  

Ronnie Lee Gardner

सतवंत सिंहबयंत सिंह- ऑपरेशन ब्लू स्टार से क्षुब्ध सिख कौम का बदला लेने के लिएभूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदरा गाँधी की हत्या उनके ही अंगरक्षक सतवंत सिंह और बयंत सिंह ने उनके आवास में गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि इंदरा गाँधी को कुल 30 गोलियाँ लगी थीं। 

जिसके बाद बयंत सिंह की हत्या बाकी अंगरक्षकों से झड़प के दौरान हो गई थी। जबकि सतवंत सिंह को कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई थी। ऐसे में जब सतवंत सिंह की फांसी पहले आखरी बार जब उसके माता-पिता उससे मिलने आये थें तो सतवंत सिंह ने अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर अपने पिता से जयकारा ('जो बोले सो निहाल सतश्री अकाल') लगाने की इच्छा ज़ाहिर की थी ताकि उन सबका मनोबल बना रहे।


Satwant Singh Beant Singh


विलियम बोनिन- मधुमेह यानी शुगर की बीमारी का ये मरीज़ जो कि एक बेहद खतरनाक मुजरिम था और जिस पर 21 बलात्कार और हत्याओं का आरोप था। स्वयं को कानून द्वारा सज़ा देने की बजाए अपनी शुगर की बीमारी से मर जाना चाहता था। इसलिए इसने अपने अंतिम भोजन में ढेरों कोकाकोलापेप्सी और चॉकलेट आइसक्रीम की मांग की ताकि ये अपने शुगर के स्तर के बढ़ने के कारण मरे न कि। लेकिन ऐसा हो न पाया और अंततः इसे सज़ा के तौर पर लीथेल का इंजेक्शन लगाना पड़ा।

William Bonin


रंगा-बिल्ला- ये दोनों नाम साल 1978 में दिल्ली के एक डबल मर्डर और बलात्कार करने वाले अपराधियों के हैं। दरअसल रंगा और बिल्ला जो छोटे मोटे चोर अपराधी थे उन्होंने फिरौती की लालच में दिल्ली के दो बच्चों 16 साल की गीता चोपड़ा और 14 साल के उसके भाई संजय चोपड़ा का कार में लिफ्ट देने के बहाने अपहरण कर लिया था। लेकिन अपहरण के बाद उन्होंने संजय चोपड़ा की हत्या कर दी और उसकी बहन से रेप के बाद उसकी भी हत्या कर दी थी। 

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने उनकी सज़ा को बरकरार रखा था। बात अगर दोनों की अंतिम इच्छा की कि जाए तो रंगा ने उस दौरान आयी एक फ़िल्म रंगा खुश का कोई डायलॉग बोलने इच्छा ज़ाहिर की थी। जबकि बिल्ला ने ऐसी कोई इच्छा ज़ाहिर नहीं की और रातभर अपने बैरेक में रोते हुए 'जो बोले सो निहाल सतश्री अकालचिल्लाता रहा।

Ranga and Billa

जॉन वेन गेसी- तीन सालों तक केएफसी में बतौर मैनेजर नौकरी कर चुके इस अपराधी ने अपनी आखरी ख्वाहिश के तौर पर केएफसी फ्राइड चिकन की एक बाल्टी के साथ ही 12 तली हुई झींगाफ्रेंच फ्राइज़ और स्ट्रॉबेरी की मांग की थी।

John Wayne Gacy


ऑटो शंकर- ऑटो शंकर या गौरी शंकर एक वक़्त मद्रास में खौफ़ का पर्याय बन चुका ये नाम कभी फ़िल्मों और पेंटिंग का शौकीन हुआ करता था। लेकिन जब शंकर ने पेंटिंग का काम बंद कर ऑटो चलाना शुरू किया तो उसके रास्ते और शौक दोनों बदल गये। उसने अपने ऑटो के ज़रिये कच्ची शराब की सप्लाई का काम शुरू कर दिया और साथ ही लड़कियों का शौक भी पाल लिया। लेकिन अपने शौक को पूरा करने के लिए वह किसी वेश्यालय में नहीं जाता था बल्कि लड़कियों का अपहरण कर उनके साथ जबर्दस्ती बलात्कार करता था और फिर उन्हें बेच भी देता था। जिसके बाद कहीं उन सबके पाप का किसी को पता न चल जाए इसलिए वह लड़कियों की हत्या कर उनके शव को जलाकर बंगाल की खाड़ी में बहा देता था। 

इस अपराधी ने पकड़ाए जाने के बाद अपना जुर्म तो कबूल कर लिया। लेकिन इसका दावा था कि इसने सभी लड़कियों का अपहरण कुछ बड़े नेताओं के कहने पर किया है। हालाँकि उसने मरने से पहले कोई अंतिम इच्छा ज़ाहिर नहीं की थी। मगर उसे उम्मीद थी कि कोई न कोई रसूखदार नेता या मंत्री उसे बचा लेगा और उसकी ये उम्मीद फांसी का फंदा गले में कसने के बाद भी जैसी की तैसी थी। 


Auto Shankar Gauri Shankar

लॉरेंस रसेल ब्रेवर- हालाँकि ये कोई पेशेवर अपराधी नहीं था लेकिन पश्चिमी देशों में प्रचलित गोरे और काले लोगों के आपसी भेदभाव से ग्रसित था। इसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर एक अश्वेत अफ्रीकन का बड़ी बेरहमी से क़त्ल कर दिया थाजिसके लिए अमेरिका के कानून ने इसे मृत्युदंड दिया था। लेकिन इसे अपने किये पर कोई पछतावा नहीं था इसने अपने लास्ट मील में 10 से ज़्यादा खाने पीने की चीज़ें मंगवा कर अपनी अंतिम इच्छा पूरी की थी।

इसने अपने अंतिम भोजन में एक ट्रिपल बेकन चीज़बर्गर ग्रेवी और प्याज के साथ दो चिकन-फ्राइड स्टेकएक पनीर और बीफ आमलेटटमाटरएक 'मीट लवर्सपिज्जाबेल पेप्परजलेपीनोसएक कटोरी भिंडीएक पाउंड बारबेक्यू मीटहाफ। चिकन फजीता तीन पूरी तरह से भरी हुई फजिट्सतीन रूट बियरएक पिंट आइसक्रीम और पीनट बटर फज का एक स्लैब मंगवाया था।

Lawrence Russell Brewer

मकबूल भट- पेशे से शिक्षक और पत्रकार मकबूल भट जेकेएलएफ यानी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का संस्थापक है जिसकी कमान फ़िलहाल यासीन मल्लिक के हाथों में है। मकबूल भट ने अपने साथी औरंगजेब के साथ मिलकर सीआईडी ऑफिसर अमर चंद की हत्या की थी। जिसके बाद उसे श्रीनगर जेल में गिरफ्तार कर रखा गया था। लेकिन वह वहाँ से सुरंग बनाकर पाकिस्तान भाग गया था बाद में वापस हिन्दुस्तान आने पर उसकी गिरफ़्तारी हुई थी और उसे फांसी की सज़ा दी गई थी। 

वहीं बाद में इस संगठन के लोगों ने भारतीय राजनयिक रविंद्र महात्रे की बर्मिंघम में हत्या कर दी थी और बाद में फांसी की सज़ा सुनाने वाले जज नीलकठ गांजू की भी हत्या कर दी थी। मकबूल भट के बारे में मिली जानकारी के अनुसार उसने अपनी कोई अंतिम इच्छा ज़ाहिर नहीं की थी।

Maqbool Bhat

विक्टर फेगुअर- अमेरिका के आयोवा राज्य के विक्टर फेगुअर नाम के कैदीजिसे साल 1963 में एक अपहरण और हत्या के आरोप में फांसी की सज़ा दी गई थी। उसने अपनि अंतिम इच्छा के तौर पर एक गड्ढे और एक जैतून के बीज देने की इच्छा जताई थी क्योंकि उसे ये उम्मीद थी कि उसके मरने के बाद उसके शरीर के अंदर एक जैतून का पेड़ पैदा होगा। अमेरिका के आयोवा में आज तक के इतिहास में इसी शख्स को अंतिम बार फांसी की सज़ा दी गई थी।

Victor Feguer

धनंजॉय चटर्जी- फांसी की सज़ा पाने वाले इस मुज़रिम पर एक 14 साल की बच्ची हेतल पारीख से बलात्कार के बाद हत्या के आरोप थे। दरअसल धनंजॉय चटर्जी उसी बिल्डिंग में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करता था जहाँ हेतल का परिवार रहता था। कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट द्वारा हेतल के बलात्कार और हत्या का शक धनंजॉय पर गया। जिसके बाद उसकी गिरफ़्तारी की गई। ये मामला अदालतमानवाधिकार संगठन आदि से 14 सालों तक गुज़रने के बाद अंततः 14 अगस्त 2004 को कोलकाता के अलीपुर जेल में ख़त्म हो गया जहाँ धनंजॉय चटर्जी को फांसी दी गई। 

उस दिन धनंजॉय चटर्जी का 39वां जन्मदिन भी था। धनंजॉय चटर्जी ने अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर जेल के डॉ बासुदेव मुखर्जी के पैर छूने की और फांसी के दौरान धार्मिक बांग्ला गान बजाने की थी जिसे जेल प्रशासन द्वारा पूरा किया गया था। धनंजॉय चटर्जी ने अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर अपने गुर्दे और नेत्र दान की भी इच्छा भी जताई थी मगर उसे पूरा नहीं जा सका।

Dhananjoy Chatterjee


जोनाथन नोबल्स- अपनी अंतिम की इच्छा के रूप में जोनाथन नोबल्स नमक अपराधी जिस पर दो लड़कियों की हत्या का आरोप था। उसने यूकरिस्ट या यानी एक प्रकार का प्रसाद या वह भोजन जो ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु की पहली रात को खाया था उसकी मांग की थी। असल में अपनी कैद की सज़ा के दौरान जोनाथन एक धार्मिक ईसाई बन गया था। इसलिए यीशु के ख़ास शिष्यों की तरह जिन्होंने मृत्यु से यीशु के साथ अंतिम बार खाना खाया था उसने भी रोटी और शराब की मांग की थी।

Jonathan Nobles

अफज़ल गुरु- संसद हमले के मुख्य आरोपी कश्मीर निवासी अफज़ल गुरु ने अपनी फांसी से पहले कुरआन की मांग की थी। जेल प्रशासन ने उसकी इस इच्छा को ससम्मान पूरा किया था। इससे पहले भी अफज़ल अक्सर अलग–अलग किताबें पढ़ता रहता था। अफज़ल ने अपनी फांसी से ठीक पहले चाय पी थी और जेल के अधिकारीयों से आम बातचीत की थी।


Afzal Guru


जेम्स एडवर्ड स्मिथ- इस अपराधी से जब इसकी अंतिम इच्छा के बारे में पूछा गया तो इसने बढ़िया खाने की जगह कुछ आपत्तिजनक चीज़ों की मांग की जिससे की ये कोई काला जादू करना चाहता था। लेकिन जेल के अधिकारीयों से उसे कोई भी ऐसी चीज़ देने से मना कर दिया।


James Edward Smith

याकूब मेमन- बॉम्बे में साल 1993 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन ने अपनी फांसी से पहले अपनी बेटी से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की थी। हालाँकि जेल प्रशासन द्वारा उसकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं की गई थी। लेकिन फोन पर उसकी बात उसकी बेटी से कराई गयी थी। याकूब को नागपुर जेल में फांसी दी गई थी।


Yakub Memon


फिलिप रे वर्कमेन- ये कोई पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि कोकीन का नशा करने वाला एक आम इंसान था। मगर अपने नशे की लत से ग्रस्त इस इंसान ने एक बार एक रेस्टोरेंट लूटने की कोशिश की और वहाँ हुई पुलिस मुठभेड़ में कथित रूप से इसके हाथों एक पुलिस वाले रोनाल्डो ऑलिवर की मौत हो गई। हालाँकि बहुत से लोगों ने इसके बचाव में गवाही दी थी मगर कोर्ट ने इसे मौत की सज़ा दी। 

अपनी मौत से पहले अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर इसने एक बड़ा वेजिटेरियन पिज़्ज़ा किसी भूखे गरीब को दान की ख्वाहिश जाहिर की थी। लेकिन जेलर ने इसकी इच्छा नकार दी इससे दुखी फिलिप ने उस रात कुछ भी नहीं खाया। इसकी सज़ा से दुखी लोगों ने इसकी याद में एक प्रथा की शुरुआत की जिसकी अगुवाई पेटा जैसे पशुओं के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था ने की। उन्होंने अपने अभियान से 12000 डॉलर जुटाए और उनसे पिज़्ज़ा तैयार कर अनाथालयों में बंटवाएँ।

Philip Ray Workman

अजमल कसाब- मुम्बई हमले के दौरान जिंदा पकड़ाए पाकिस्तानी आतंकवादी अज़मल आमिर कसाब को साल 2012 में यरवड़ा जेल में फांसी दी गई थी। जेल अधिकारीयों के अनुसार उसने अपनी कोई अंतिम इच्छा ज़ाहिर नहीं की थी।

Ajmal Amir Kasab

ओडेल बार्नेस- एक लुटेरा और हत्यारे ओडेल बार्नेस जो जेल जाने के बाद काफ़ी बदल गया था। उसने अपनी मौत से पहले विश्वशांतिन्याय और समानता के लिए कुछ करने की इच्छा जताई थी। हालाँकि अपने योगदान के रूप में वह ऐसा कुछ भी नहीं कर पाया।

Odell Barnes


क्या है अंतिम प्रक्रिया?

फांसी वाले दिन तड़के सुबह मुजरिम को बजे जगाया जाता है। उसके बाद उसे पीने के लिए सिर्फ़ चाय दी जाती है और उसकी इच्छा के अनुसार पढ़ने के लिएधार्मिक पुस्तकें प्रदान की जाती है। फाँसीघर में मौजूद सभी लोगों को लीवर खींचने के दौरान अपनी आँखें बंद रखनी होती है। जल्लाद द्वारा लीवर खींचते ही मुज़रिम का शरीर 15 फीट गहरे गड्ढे नुमा स्थान में लटक जाता है। इसके कुछ देर बाद जेल का सरकारी डॉ मुजरिम के शव की जांच कर उसकी मृत्यु की पुष्टि करता है।

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