सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हंगामा क्यों है बरपा, पूछताछ ही तो की है ?

अर्णव   गोस्वामी के अलावा भी पूरे देश में ऐसे सैकड़ों पत्रकार हैं जो अपना काम बड़ी मेहनत और ईमानदारी से करते हैं। हाँ ये अलग बात है कि वो इतने रसूखदार नहीं हैं कि किसी नेता, मंत्री या राजनीतिक दल या देश की मीडिया ये मठाधीशों को उनकी चिंता हो। ताज़ा उदहारण के तौर पर याद कीजिये उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के सामान्य से पत्रकार पवन जायसवाल को, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा इसलिए प्रताड़ित किया गया, उसपर मुकदमा कर दिया गया।   क्योंकि उसने अपनी एक ग्राउंड रिपोर्ट में मिडडे मील के नाम पर सरकारी स्कूल के बच्चों को नामक रोटी परोसने की घटना को उजागर किया था। न कि स्टूडियो में बैठकर कोरे आरोप लगाए थे। ऐसी स्पष्ट और साहसिक पत्रकारिकता करने वाले मीडियाकर्मी के लिए क्या किसी बड़े पत्रकार ने, मीडिया के मठाधीश ने इंसाफ दिलाने के लिए कोई पहल की ?         ऐसे में अर्णव गोस्वामी का पक्ष लेने वाले पत्रकारों, नेताओं आदि को ये याद रखना चाहिए कि, अर्णव पूरे भारतीय मीडिया या भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि नहीं है। साथ ही वर्तमान में वो एक बड़े मीडिया हाउस के मालिक भी हैं इसलिए इस बात से कतई इंकार नहीं किया ज

गूगल ने इस ऐप की सेवा लेनी बंद कर दी है, आप भी बंदकर दीजिये!

ज़ूम ऐप नाम तो सुना ही होगा आपने! पूरी दुनिया में   कोरोना   संक्रमण के कारण जब लोगों के कामकाज में दिक्कतें आने लगी। तो ,  वर्क फ्रॉम होम   या बाक़ी ऑनलाइन कामों के लिए दुनियाभर के लोगों ने एक दूसरे से जुड़ने के लिए   ज़ूम ऐप   का सहारा लेना शुरू कर दिया। जिससे न ही सिर्फ़ इस ऐप के यूज़र्स/डाऊनलोड्स की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई। बल्कि ज़ूम ऐप बनाने वाली कंपनी के सीईओ   एरिक युआन   की कमाई में भी बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली।   लेकिन अब इस ऐप को लेकर रोज़ाना जिस तरह के ख़ुलासे सामने आ रहे हैं वो डराने वाले हैं ,  वो चौकाने वाले हैं  साइबर सुरक्षा   के विशेषज्ञों के हिसाब से इस ऐप पर यूज़र का डाटा बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। यानी अगर आप इस ऐप को अपने मोबाइल फोन के ज़रिए इस्तेमाल में लाते हैं तो ये आपके मोबाइल फोन के डेटा   की सेंधमारी कर सकता है। वहीं अगर आप इसे अपने लैपटॉप/डेस्कटॉप के ज़रिए इस्तेमाल में लाते हैं तो ये आपके लैपटॉप में मौजूद सारा डेटा उड़ाकर किसी भी   हैकर   तक पहुंचा सकता है।   गूगल जैसी टेक विशेषज्ञ कंपनी भी न जाने कब इस   असुरक्षित   ऐप के जंजाल में फंस गई।