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एच1 एन1 इन्फ्लुंज़ा- जिसने लील ली थीं करोड़ों ज़िंदगियाँ !

कोरोना से संकटग्रस्त पूरी दुनिया के मौजूदा हालात को देखकर ऐसा लगता है जैसे हम सभी हॉलीवुड की कोई साइंस फिक्शन/सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म देख रहे हों। जिसमें कुछ इंसानों की गलती का खामियाज़ा पूरी मानव जाति के अस्तित्व पर संकट बन मंडरा रहा हो।   जिसमें हर इंसान अब इस डर के साथ अपनी ज़िंदगी काट रहा हो कि अगला नंबर उसका ही लगने वाला है। हम रोज़ाना ज़िंदगी से एक दिन और, एक दिन और उधार मांगकर जी रहे हों। ऐसे में पता नहीं कब ज़िंदगी हमें ये उधार देना बंद कर दें, कब एक छोटी सी गलती हमें उस संकट के और नजदीक ले जाए जहाँ से वापस ज़िंदगी का रास्ता फ़िलहाल खोजे नहीं मिल रहा।   लेकिन सच तो ये है कि न ही ये कोई बुरा सपना है और न ही हम हॉलीवुड की कोई साइंस फिक्शन/सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म। देख रहें हैं। बल्कि ये मानव सभ्यता का वो एक कड़वा सच है जिसे लगभग पूरी मानव जाति भोग रही है।वहीं जो लोग फ़िलहाल इससे बचें हुए हैं वो भी डरे हुए हैं। क्योंकि कोई नहीं जानता कि ये अदृश्य बीमारी कब दबे पाँव उनके दरवाज़े पर दस्तक दे दें।   ऐसे में सवाल ये है कि क्या मानव सभ्यता के इतिहास में ऐसी भयंकर घटना पहली बार घट रही है