Skip to main content

Posts

Showing posts with the label देख लो

आखरी उम्मीद- प्रिंट मीडिया

तेज़ी से पैर पसारते डिजिटल मीडिया के युग में ये दुर्लभ तस्वीर मैंने अपने मोबाइल से नॉएडा के सेक्टर- 4 में ली थी ।





#प्रिंटबनामडिजिटल  

ऐसी ख़ुशी देखी है कहीं ?

ये बच्चे मुझे ऑफिस आते हुए सेक्टर 16 के मेट्रो स्टेशन के बाहर एक पान की दुकान पर दिख गए। किसी के माँ-बाप पान,सिगरेट बेचते है तो किसी बूट पोलिश करते है। वो दिन भर अपने इन नौनिहालों को ऐसे ही सड़कों पर बिना किसी डर के आज़ाद छोड़ रहते है। एक हमलोग है अगर बच्चा जरा भी मिटटी में खेल ले तो फटा-फट उन्हें नेहला-धुला के साफ़ करते है। हाईजीन, साफ़-सफाई ज़रूरी है कहीं इन्फेक्शन न हो जाए. बीमार न पड़ जाए। एक ये है मस्तमौले ग़ुरबत की ज़िन्दगी में आधे पेट खाए असली हंसी बिखेरते। यकीन मानिये कभी किसी झोपड़ पट्टी में किसी गरीबों की बस्ती में जाइए वहां आपको ज़्यादातर बच्चे भूखे मिलेंगे मगर ज़िन्दगी से डरे एवं रोते नहीं मिलेंगे।

हमसे तो नै हो पाएगा भईया, तुम्हीं जला लो अपने अन्दर के रावण को।

राम रहीम,आशाराम,फलहारी बाबा को पूजों जो स्त्रियों को अपनी गुफाओं में ले जाकर मर्यादा लांघते है। और सालों अपनी अशोक वाटिका में सीता को सुरक्षित रखने वाले रावण को जलाओं अपनी बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने वाले का तिरस्कार करों और धोबी की बातों से उत्पन्न संशय के लिए गर्भवती पत्नी को छोड़ने वाले को मर्यादा पुरषोतम बताओं। बेटियों पर लाठी-डंडे बरसाओ, कोई सवाल करें तो रंडी बताओं।जला तेजाब से उनके चहरे अपनी भड़ास मिटाओं। वाह रे रामवालों। 

जीवन ठेला गाड़ी.................

कुछ वक्त पहले यहीं पैसेफिक माॅल के पास इनका घर था। एक झोपड़ी थी, गैरकानूनी झोपड़ी। उसे एमसीडी वालों ने उजाड़ दिया। अब ये यहीं पास के डिवाइडर के अंदर खाली पड़ी जमीन पर रहते है। खुले आसमान के नीचे बीच सड़क पर। बाप-भाई इसी ठेला गाड़ी को चलाते है आज ये  ठेला गाड़ी इनके पानी ढोने-नहाने का ठिकाना बन गया।

क्योंकि ये भगवान दिव्यांग है

ये दोनों दिव्यांग गणपति कल मुझे मेरे आॅफिस के पास नोएडा में मिल गए। कोई इन्हें सड़क किनारे रेडलाइट के पास छोड़कर चला गया। सच में ये दुनिया बहुत बुरी है इंसान हो या भगवान दिव्यांग हो जाए तो उसकी कोई कद्र नहीं रहती।

नज़र न लगे,  विरले ही है देश में ऐसे नज़ारे