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अल्लाह के नाम पर या मुल्ला के नाम पर ?

ज़ायरा वसीम जब फिल्मों में आयी थी तो ये उसकी मर्ज़ी थी। अब अगर वो फिल्मों में काम नहीं करना चाहती तो उसके फैसले का सम्मान होना चाहिए, न कि उसके फैसले पर स्टुडियो वाली अधकच्ची जानकारी के आधार पर मुर्गा लड़ाई आयोजित कर टीआरपी बढ़ाने का बेशर्म काम किया जाना चाहिए।

हालांकि अगर हम अपने आस-पास झांके तो हमें आपने आस-पास अल्लाह के ऐसें हज़ारों बंदे मिल जाएंगे जो दिनभर, 5 वक़्त की नमाज़ में अल्लाह से उनके लिए एक बार बॉलीवुड के रास्ते खोल देने की दुआ करते रहते हैं।



जबकि ज़ायरा वसीम की गलती ये  है कि वो बॉलीवुड को छोड़ने को लेकर कोई तर्कसंगत ठोस जवाब नहीं दें पायी जिससे कि उसके इस निजी फैसले पर कोई सवाल न उठे। दरअसल सही मायने में तो उसे किसी तरह का जवाब या सफाई देने की ज़रूरत थी भी नहीं।  कि, वो अपनी जिंदगी में आगे क्या करना चाहती है। लेकिन शायद ज़ायरा ने उम्र और तजुर्बे के कच्चेपन में ये एक चाही-अनचाही गलती कर दी।

उसने जिस तरह से अपने फैसले को धर्म, मज़हब से प्रभावित होकर लेने की बात कही वो बात कईयों के गले नहीं उतर रही। क्योंकि, बॉलीवुड में आजतक अगर किसी धर्म-जात या मज़हब के लोगों का राज रहा है तो उसमें प…

कादर खान- मुफ़्लिसी से मस्खरी के उस्ताद तक का सफ़र !

81 साल की उम्र में बॉलीवुड के हास्य अभिनेता एवं हिंदी फिल्मों के जाने माने अभिनेता कादर खान का निधन (Kadar Khan Died) हो गया। भारतीय फिल्मों (Indian Movies) के ज़्यादातर दर्शक कादर खान को उनके कॉमेडी वाले रोल्स के लिए जानते हैं। मगर असल मायनों में कादर खान का शुरूआती जीवन कितना संघर्ष भरा और दुखदायी रहा उसकी जानकारी शायद ही किसी को हों। मेरे इस ख़ास ब्लॉग में पढ़िए कादर खान की जिंदगी से जुड़े कुछ सच्चे किस्सों को...
कादर खान का परिवार मूलतः काबुल का रहनेवाला था। वे वहींएक मुस्लिम परिवार मेंजन्मे थें। उनके वालदैन बेहद ग़रीब थे। एक तरह से कहें तो खाने के लाले थे। कादर खान से पहले उनके तीन भाई और थे जो सभी आठ साल के होते-होते मर गए। जब कादर खान पैदा हुए, तब उनकी माँ का अपनी पिछली औलादों की मौत का डर फिर से उन्हें परेशान करने लगा। उन्हें लगा कि ये जगह उनके बेटे के लिए सही नहीं हैं। वे बेहद डरी हुई थीं ” उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वे कहाँ जाए। बहरहाल वे वहाँ से अपने पति के साथ निकल पड़ी और पता नहीं कैसेवेआजके मुंबई पहुँच गए। अनजाना मुल्क, अनजान शहर। न कोई जान-पहचान वाला न ही पास में एक धेला।

ये था असली टाइगर

आज सलमान खान की बहुचर्चित फिल्म एक था टाइगर का सीक्वेंस रिलीज़ हो रही है। मगर कम ही लोग जानते होंगे कि परदे पर टाइगर के नाम की शौहरत पा रहे सलमान खान की इस ख़ुफ़िया जासूस टाइगर वाली कहानी सिर्फ एक काल्पनिक कहानी नहीं है। बल्कि ये कहानी भारत के असली ख़ुफ़िया जासूस ब्लैक टाइगर के जीवन की असली कहानी है। जी हाँ,  ब्लैक टाइगर भारत का वो जाबाज़ खुफिया जासूस जिसे भारत के तात्कालीन गृहमंत्री एस बी चव्हाण ने उसकी बहादुरी भरे कारनामों के लिए ब्लैक टाइगर के खिताब से नवाज़ा था।
आइये जाने उस असली हीरो असली टाइगर की कहानी जिसने इस देश के लिए अपनी जान दे दी। मगर अंतिम वक़्त में देश की मौजूदा सरकार ने उसे अपना जासूस मानने से इंकार कर दिया था।
रविंद्र कौशिक, यहीं नाम था हिन्दुस्तान की धरती पर पैदा हुए ‘एक था टाइगर’ के असली टाइगर का। इनका जन्म 11 अप्रैल 1952 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था। रवींद्र कौशिक के पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी थे साल 1971 में सेवानिर्वित होने के बाद वे अपने परिवार के साथ दिल्ली में आकर बस गएथे रविंद्र कौशिक एक बेहतरीन थिएटर कलाकार थे, उनके इसी हुनर ने उन्हें कलाकार से भारत सरक…

महमूद- एक हरफनमौला कलाकार, किंग ऑफ़ कॉमेडी

“दे अल्लाह के नाम पर दे दे दीनार नहीं तो डॉलर चलेगा डॉलर नहीं तो शर्ट का कॉलर चलेगा”
महमूद साहब किसके चहेते नहीं थे, एक ऐसा कलाकार जिसने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे मगर हँसते हंसाते रहेहरफनमौला कलाकार कभी एक्टर तो कभी निर्देशक कभी गायक और जबरदस्त कॉमेडियन तो वे थे ही आज उनका जन्मदिन है जानिये महमूद के जीवन कुछ अनकहे किस्सों के बारे में, जानिये क्यों अंतिम दिनों में अमिताभ बच्चन से बेहद खफा रहे महमूद और उन कलाकारों के बारे में जिनमें महमूद के साथ काम करते वक़्त अन्दर एक डर होता था अपने रोल के कट जाने का, चिढ़ थी की ये अब हमसे भी ज्यादा पैसा लेने लगा है- सन 1932 में जाने–माने कलाकार और डांसर मुमताज़ अली एवं लतिफुनिसा की आंठवी संतान के रूप में महमूद का जन्म माया नगरी मुंबई में हुआ था। महमूद के पिता मुमताज़ अली 40-50 के दशक के जाने माने नृत्य कलाकार थे, उनकी बहन मीनू मुमताज़ भी एक सफल नृत्यांगना एवं अदाकार रही।
अंडे से लेकर मुर्गी के चूजे तक बेचे-
महमूद के एक्टिंग करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट बोम्बे टाकिस्ज़ की फिल्म ‘किस्मत’ से हुई थी। महमूद यहाँ अपने पिता मुमताज़ अली के साथ अक्सर जाया…