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...इसलिए भारत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर छा रहें हैं मंदी के बादल !

भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल पिछले कुछ महीनों से स्पष्ट रूप से आने वाली मंदी के संकेत दे रही है। हालांकि अर्थव्यवस्था के जानकारों को ये दबाव एक के बाद एक किये गए नोटबंदी और जीएसटी के प्रयोग के तुरंत बाद से ही समझ आने लगा था। मगर केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये के कारण इसका कोई ठोस हल नहीं निकल पाया। मेरे अपने शहर जमशेदपुर जहां एशिया की सबसे विशाल(Adityapur IndustrialAreaDevelopment Authority - AIADA Jharkhand India). में स्थित 1100 छोटी-बड़ी फैक्टरियां इस मंदी की शुरूआती भेंट चढ़ चुकी हैं
कारण टाटा मोटर्स का अपना उत्पाद घटाया जाना। जिनके लिए ये सभी फैक्टरियां विभिन्न प्रकार के ऑटो पार्ट्स बनाती थी। आप खुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितने लोग बेरोज़गार हुए होंगे कितने परिवारों की रोज़ी-रोटी का संकट आन खड़ा हुआ होगा। मगर दुर्भाग्य से ये संकट शायद जल्द न टल पाए क्योंकि डगमगाती भारतीय अर्थव्यवस्था के बाद अब जर्मनी और चीन जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियों ने भी बुरे संकेत देने शुरू कर दिए हैं पूरी ख़बर नीचे पढ़ें...

जीएसटी और नोटबंदी के प्रयोग से चरमराई भारतीय अर्थव्यवस्था एवं भारतीय बाज़ार में तेज़ी से ख़राब हो रही ऑटो…

ज़िक्र 84 दा, साड्डे दिल चे वस्सी उदासी दा

सन 1984 के सिख विरोधी दंगों में बहुत से सिख परिवारों को बर्बाद कर दिया था। दिल्ली और उत्तर भारत के बाकी इलाकों से आए दिन सिखों की निर्मम हत्याओं की ख़बरें अख़बारों में भी छपती रही। मगर देश की राजधानी से कोसों  दूर मेरे शहर जमशेदपुर के सिख समुदाय ने कैसे अपना ये वक़्त गुज़ारा इसके किस्से मुझे मेरे घर के बड़ों ने सुनाए थे। दो दिनों पहले जब सिख दंगों के एक मुख्य आरोपी सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस घटना का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई तो पुराने ज़ख्म हरे हों गए। 



मेरे जैसे कानून को जानने-समझने वाले इस सज़ा को सुनकर भी इसलिए नहीं खुश हैं क्योंकि अभी भी देश के  सबसे बड़े कोर्ट की इस मामले से जुड़ी सुनवाई बाकी है। पता नहीं वहाँ से कब और क्या फैसला आएगा और उन दंगों में अपना सबकुछ गवां चुके कितने लोग उसे सुन पाएंगे। क्योंकि 39 साल की उम्र में जिस सज्जन कुमार ने ये कांड किया था उसे तो उसके कुकर्मों  की सज़ा 73 साल में मिल रही है जब वो ऐसे भी मरने ही वाला है।       

बात सन 1984 के सिख दंगों की! मेरे शहर जमशेदपुर में भी मौजूद सिख/पंजाबी समुदाय देश के बाकी शहरों/राज्यों के सिखों की तरह दहशत…

इसलिए नज़र बनाए रखें !

उर्जित पटेल ने अपना इस्तीफा भले ही निजी कारणों का हवाला देकर दिया हो। मगर देश के अंदर क्या चल रहा है ये किसी से छिपा हुआ नहीं है। वैसे भी आँकड़े उठाकर देख लीजिए ज़्यादातर विवादों के बाद इस्तीफा देने वाले नौकरशाह अपने इस्तीफ़े का काऱण निजी वजह ही बताते हैं।


बहरहाल पिछले दिनों  जब सरकार और आरबीआई गवर्नर (RBI Governor) के बीच टकराव की खबरें आई थी तो, उसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा आरबीआई से 3.6 लाख करोड़ रुपये मांगे की थी। हालाँकि उस खबर के सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने उसे झूठी ख़बर बताकर खारिज़ कर दिया था।


मगर अब जबकि अस्पष्ठ रूप से आरबीआई की कमान केंद्र सरकार के हाथों में होगी। तो, ये देखने वाली बात होगी कि सरकार अपने किस चहेते को अपना नया मुंशी नियुक्त करती है। साथ ही इस कार्य को करने में कितना वक़्त लगती है।


क्योंकि, यदि लंबे वक्त तक आरबीआई की कमान केंद्र सरकार या वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के हाथों में रहेगी तो वह आरबीआई के कोष में जमा देश के धन को अपने लिए खर्च कर सकती है। इस अंदेशे से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में ज़रूरी है कि मीडिया, आर्थिक मामलों के जानकार, विपक्ष एवं आम आदमी …

धर्म या तो इंसान को अंधविश्वासी बनाता है या फिर आतंकवादी!

ये एक शवयात्रा का दृश्य है। जैन मुनी तरुण सागर की शवयात्रा। कहते हैं कि जैन धर्म की मूल जड़ सनातन धर्म से ही जुड़ी हुई है। इसका उदय  भी सिख पंथ की तरह हिन्दू धर्म के आडंबरों से मुक्ति पाने के लिए हुआ था।


मगर क्या इस तस्वीर में शवयात्रा का ये तरीका किसी घोर धार्मिक आडंबर से कम है? क्या समय के साथ सभी धर्मों को देश-दुनिया के सामाजिक परिवर्तन के साथ ख़ुद को     इतना भी अपडेट नहीं करना चाहिए कि उनके गुरु की अंतिम यात्रा थोड़ी  सम्मानजनक तरीक़े से निकाल पाए?

क्यों हर धर्म और उसके अनुयायी पढ़ने-लिखने के बावजूद आज भी लकीर के फ़क़ीर बने फिरते हैं? क्यों हर धर्म समुदाय के ठेकेदारों ने समय के साथ उसी नई व्यवस्थाओं को स्वीकार किया जो उनके अनुकूल थी और बाकी के बदलावों  को हराम और हलाल, धार्मिक और अधार्मिक कृत्य में वर्गीकृत कर दिया?


क्या ये अपने आप में धर्म के नाम पर धर्म के साथ किसी छलावे से कम है कि आज भी मौलाना फ़तवे जारी कर मुसलमानों को ये बताते हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसी न बनवाएं ये इस्लाम में हराम है।
क्यों आज भी जीवहत्या को धार्मिक आधार पर सही और गलत बताया जाता है। जो हिन्दू धर्मलम्बी गौ हत्या को पाप बता…

खोजी पत्रकार ने किया अपनी ही रसोई की भूतनी का स्टिंग ऑपरेशन !

एक खोजी पत्रकार जिसे कई घोटालेबाजों के स्टिंग ऑपरेशन करने का तजुर्बा हासिल था। उसने दिल्ली-एनसीआर में एक नया फ्लैट खरीदा। सारा परिवार खुशी-खुशी वहां शिफ्ट हो गया। कुछ दिन सबकुछ बहुत अच्छे से चला। फिर उस फ़्लैट में एक अजीबों-गरीब परेशानी उत्त्पन्न हो गई। पत्रकार की पत्नी रात को सोने से पहले अपने रसोईघर को अच्छी तरह से धो-पोछकर, फ्रिज लाइट का बटन, वाशबेसिन का नल, आदि बंद करके सोती।
मगर अक्सर सुबह उसके रसोई के वाशबेसिन का नल खुला मिलता, टंकी का सारा पानी भी खत्म हो गया होता। पत्रकारने प्लम्बर को बुलवाया ऊपर से नीचे तक का सारा कनेक्शन चेक करवाया। मगर कहीं कुछ समझ नहीं आया।

थोड़े दिन यूं ही पार करने के बाद किसी पड़ोसी ने बातचीत के दौरान पत्रकार की पत्नी को बताया कि आपसे पहले जो लोग यहां रहते थे उन साहब की पत्नी को खाने-पकाने के बड़ा शौक था। मगर किसी आपसी झगड़े से परेशान होकर उसने इसी फ़्लैट में आत्महत्या कर ली। हो न हो ये उसी की आत्मा का काम है।
उसके बाद उनके पति ने ये फ़्लैट बेच दिया और किसी और शहर में चले गए। उस पड़ोस की बातों की अनुसार पत्रकार की पत्नी ने बिना सोचे समझे मान लिया की उसकी रसोई में ज़र…

कल कुछ अच्छा भले न बोलिए सच्चा ज़रूर बोलिए

हेल्लो मोदी जी..... हां कौन, जी जनता, पहचाने! मललब वही जिसे आप जिन्हें भाईयों और बहनों, मित्रों-मित्रों कहकर संबोधित करते है वही वाली जनता आपके देश की।   आपके कल के भाषण के लिए आपने जनता से आईडिया माँगा था न, रीमेम्बर ? याद आया..... ?????
मेरे पास है कुछ मसालेदार आईडिया आपके कल के लाल कीले वाले भाषण के लिए सच में आगा लगा देंगे स्टेज पर। बस आप बोलने के लिए 56 इंच वाली छाती तैयार रखिये। सर अपने जबसे हमसे आईडिया मांगे थे तब से तड़प रहा हूँ की क्या बताऊ, क्या छोडू। वो क्या है न कि अब आप लोगों मतलब की पार्टी वालों की भी करतूते कम नहीं रह गयी है तो सोचा वही सब याद करा दूँ बोलने के लिए। अच्छा वो पानाम पेपर वाला मुद्दा कैसा रहेगा उससे शुरू कीजिये तो कैसा रहेगा? देखिए न  आतंकवाद की नर्सरी, स्कूल, कॉलेज चलाने वाले देश ने भी अपने प्रधानमंत्री को नहीं बक्शा। तो फिर आप तो पता नहीं कितनी बार किसकी-किसकी कसम खा चुके है कि भारत से भ्रष्ट्राचार ख़त्म करके ही रहेंगे। तो फिर बोलिए कुछ तगड़ा सा अपने भाषण में कहिये कुछ अपने जबरा फैन्स को खुश करने वाला।
दूसरा वो चीन का क्या करना है कुछ बताइए मललब चाइना की बनी र…

यो छोरियां के छोरों से कम सै?

!! गर देखना है मेरी उड़ान को तो जरा और ऊँचा करलो आसमान को !!
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने एक दिवसीय क्रिकेट मैच की दुनिया में पुराने सभी रिकार्ड्स को ध्वस्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। मगर जिस देश में क्रिकेट को धर्म माना जाता है वहां क्रिकेट के पुजारी, पंडे, भक्तों में मुझे वैसा उत्साह, वैसी ख़ुशी खोजे नहीं मिल रही जैसी हमारे पुरुष क्रिकेट के खिलाड़ी देवताओं के प्रति देखने को मिलती है।
क्या कारण हो सकता है इस भेद-भाव का, ऐसी अनदेखी, सुस्ती का? शायद महिला क्रिकेट से होने वाली कमाई इसका स्टारडम ही एक मुख्य वजह है कि ज़्यादातर क्रिकेट प्रेमी जो किसी भी मैच के लिए ऑफिस-कॉलेज नागा कर लेते है, अपने व्यापार की हानि बर्दाश्त कर लेते है, ब्लैक में भी टिकट्स खरीद लेते है और रात-रात भर स्टेडियम के बाहर लाइन में एक अदद टिकट के लिए पागलों की तरह खड़े रहते है उन्हें महिला क्रिकेट में या यू कहें कि भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को छोड़कर किसी भी अन्य खेल में वो चमक नहीं दिखती जिसके वो दीवाने है। फिर बात भले महिला क्रिकेट की हो या फिर कब्बड्डी और हॉकी की हर जगह वस्तुस्थिति कमोवेश एक …