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क्या हम ऐसा कुछ नहीं सोच सकते हैं ?

छोटा सा यूरोपियन देश लक्समबर्ग अपने शहरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सार्वजनिक यातायात सेवा को नि:शुल्क (Free Public Transports) करने वाला पहला देश बनाने जा रहा है। लक्समबर्ग में साल 2019 से सार्वजनिक परिवहनों की नि:शुल्क सेवा शुरू कर दी जाएगी।
विभिन्न मीडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी के जेवियर बेटेल के नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार ने यह निर्णय अपने ग्रैंड डची केकार्यालय में लिया है। सरकार ने अगले साल गर्मियों में ट्रेनों, ट्राम और बसों पर टिकट और किराए को समाप्त करने का वादा किया है।

हालाँकि अभी भी वहाँ दो घंटे तक की यात्रा के लिए अधिक से अधिक € 2 काही खर्च आता है। यानी कि देश में सार्वजनिक परिवहन (Fares for Public Transport) का किराए अभी भी उचित हैं। वहीं छोटे से देश में गाड़ियों की भीड़ को कम करने में और भी सहायता मिलेगी। साथ ही, ऐसी खबर भी हैं कि सरकार सार्वजनिक परिवहन (रेलयात्रा) के प्रथम श्रेणी के किराए को (€ 4) से घटाकर (€ 3) और पूरे दिन द्वितीय श्रेणी के टिकट की दर को भी कम कर सकती है।


आपको बता दें कि वहाँ का एक आम युवा अपने वार्षिक "एमपास"…

जीवन की जंग

दोस्तों हर किसी के जीवन में एक क्षण ऐसा आता है जब हम खुद को हारा हुआ मानने लगते है। फिर चाहे बात उम्र के उस पड़ाव की हो जहां इंसान अपनी बढ़ती ज़िम्मेदारियों के बोझ से परेशान होकर हार मानने लगता है या फिर उन नौजवानों की जो वक़्त पर करियर में सेट नहीं हो पाने के कारण परेशान होते हैं या फिर उन स्कूल स्टूडेंट्स की जिनके इम्तेहान के रिजस्ट्स उनके मुताबित नहीं आने पर अपना साहस खो देते हैं। कई बार तो दोस्तों लोग इन सारी घटनाओं से इतने विचलित हो जाते हैं कि अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर लेते हैं। जबकि एक पक्षी के जीवनचक्र से प्रेरित आज की हमारी कहानी ऐसी ही परिस्थितियों से लड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। जब हम हताश होकर खुद को हारा हुआ मनाने लगते हैं। 
बाज़ लगभग 70 वर्ष जीता है, परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग पंजे, चोंचऔरपंख निष्प्रभावी होने लगते हैं। पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है वह शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं।चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।पंख भा…

इसलिए ज़रूरी है हर हीरे की पहचान

बहुत पुरानी बात है एक दिन किसी गाँव के पास के जंगल से एक चरवाहा अपनी भेड़-बकरियां चराकर वापस लौट रहा था। पास ही नदी के किनारे गाँव के कुछ बच्चे खेल रहे थे। वहीँ खेलते-खेलते बच्चों के झुण्ड में से किसी एक बच्चे को रेत में दबा एक बहुत खूबसूरत चमकीला पत्थर मिला। सभी बच्चों ने उसे देखा और उस पत्थर की खूबसूरती की तारीफ की मगर कोई भी उस पत्थर की सही पहचान नहीं कर पाया, ये उनकी आयु अनुसार अर्जित ज्ञान का अभाव था।

पास से गुजरते हुए चरवाहे ने जब बच्चों के हाथों में वो चमकीला पत्थर देखा तो बड़ी उत्सुकता से उसे अपने हाथों में लेने के लिए बच्चों की ओर गया। वहां बच्चों ने बड़ी आसानी से वो चमकीला पत्थर उस चरवाहे के हाथों में दे दिया, बच्चे थे।वो कहाँ उस चमकीले पत्थर का मोल समझते थे। खैर मोल तो वो चरवाहा भी नहीं समझता था कि आखिर ये खूबसूरत पत्थर है क्या। मगर उसे वो पत्थर भा गया।

उसने बच्चे से पूछा कि क्या वो ये पत्थर रख सकता है बदले में वो उस बच्चे कोअपनी एक बकरी का दूध अभी निकाल कर पिलाएगा। बच्चा खुश हो गया उसने कहा ठीक है, सौदा हो गया बच्चे को बकरी का दूध मिल गया और बदले में उसने वो चमकीला पत्थर चरवाह…

खोजी पत्रकार ने किया अपनी ही रसोई की भूतनी का स्टिंग ऑपरेशन !

एक खोजी पत्रकार जिसे कई घोटालेबाजों के स्टिंग ऑपरेशन करने का तजुर्बा हासिल था। उसने दिल्ली-एनसीआर में एक नया फ्लैट खरीदा। सारा परिवार खुशी-खुशी वहां शिफ्ट हो गया। कुछ दिन सबकुछ बहुत अच्छे से चला। फिर उस फ़्लैट में एक अजीबों-गरीब परेशानी उत्त्पन्न हो गई। पत्रकार की पत्नी रात को सोने से पहले अपने रसोईघर को अच्छी तरह से धो-पोछकर, फ्रिज लाइट का बटन, वाशबेसिन का नल, आदि बंद करके सोती।
मगर अक्सर सुबह उसके रसोई के वाशबेसिन का नल खुला मिलता, टंकी का सारा पानी भी खत्म हो गया होता। पत्रकारने प्लम्बर को बुलवाया ऊपर से नीचे तक का सारा कनेक्शन चेक करवाया। मगर कहीं कुछ समझ नहीं आया।

थोड़े दिन यूं ही पार करने के बाद किसी पड़ोसी ने बातचीत के दौरान पत्रकार की पत्नी को बताया कि आपसे पहले जो लोग यहां रहते थे उन साहब की पत्नी को खाने-पकाने के बड़ा शौक था। मगर किसी आपसी झगड़े से परेशान होकर उसने इसी फ़्लैट में आत्महत्या कर ली। हो न हो ये उसी की आत्मा का काम है।
उसके बाद उनके पति ने ये फ़्लैट बेच दिया और किसी और शहर में चले गए। उस पड़ोस की बातों की अनुसार पत्रकार की पत्नी ने बिना सोचे समझे मान लिया की उसकी रसोई में ज़र…

ये घोड़ा आपका है इसके इस्तेमाल से मत डरिये

दोस्तों अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि इंसान अपनी पसंद के जरूरत के बहुत से काम सिर्फ ये सोचकर नहीं करता कि दुनिया क्या सोचेगी,  पास-पड़ोस के लोग क्या कहेंगे। दरअसल अपने दैनिक जीवन मेंहमजितने तरह के लोगों से मिलते है उन सबके विचार हमारे प्रति अलग-अलग होते है। इन्हीं पराये विचारों के दबाव में आकर हम अपना आत्मविश्वास खो देते है, और न चाहते हुए भी गलत निर्णय ले लेते है। आज की ये कहानी ऐसे ही पिता-पुत्र के सफर से जुड़ी हुई है जहां दोनों पिता-पुत्र अनजाने लोगों की बातों में आकर बेवजह अपने सफर का आनंद गवां देते है।

एक बार पिता-पुत्र का एक जोड़ा व्यापार के सिलसिले में अपनेएक पालतू घोड़े पर सवार होकर घर से निकलता है। रास्ते में वे दोनों कई अनजान शहरों से गुजरते है। मार्ग में जब वे चाय-नाश्तें के लिए एकअनजान नगर में रूकते है तो एक अपरिचित व्यक्ति उन्हें टोक कर कहता है कि “भाई आप कैसे कठोर लोग है। एक बेचारे बेज़ुबान जानवर पर दो-दो लोग सवार है ये भी भला कोई बात हुई, शर्म करो।“
उसकी बातों से वे दोनों पिता-पुत्र स्वयं को दोषी मानकर फटाफट घोड़े से उतर जाते है। उसके बाद अपने बेटे के कहने पर बुर्जुग पिता घोड़े…

ऐसे बचाए अपने आधार कार्ड की जानकारी लीक होने से

आधारकार्ड की शुरुआत के दिनों में विपक्ष में रहते हुए भाजपा इसे असुरक्षित बताते हुए इस मुद्दे को लेकर जहां सुप्रीमकोर्ट कोर्ट तक चली गयी थी।वहीँ सत्ता में आने के बाद आज वही भाजपा आधारकार्ड को हर सरकारी योजना से जोड़ने में आतुर है एवं निहायती सुरक्षित भी बता रही है।

हमारी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है या नहीं इस बात पर सभी का अपना-अपना मत हो सकता है।आपको यहाँ ये बता दूँ कि चीन सरकार द्वारा चलाई गयी ऐसी ही एक योजना से एकत्रित डेटा आज वहां की सरकार की गलतियों के कारण वहां की कई कंपनियों तक पहुँच चूका है जिसकी खबर कुछ समय पूर्व मीडिया में आई थी। साथ ही हमारे यहाँ भी कई सरकारी पोर्टल्स से लाखों लोगों के आधार कार्ड की जानकारी लीक हो चुकी है। इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी के आधार कार्ड के लीक होने की खबर मीडिया में खासी चर्चा में रही थी।वहीँ चाइना में लीक हुए डेटा में वहां के आम नागरिकों के साथ ही कई प्रतिष्ठित लोगों के डेटा में भी सेंधमारी हो चुकी है जिसमें अलीबाब के फाउंडर जेक मा भी शामिल है।

ऐसे में आधार कार्ड को अनिवार्य बना चुकी भारत सरकार क्या इसके दुरुप्रयोग से …

कहीं आपके ऑफिस में भी तो नहीं घुस आया है ये सांप?

ये कहानी दुनिया के एक बड़े शहर में तेज़ी से बढ़ती एक प्राइवेट कंपनी और उसके कर्मचारियों के बीचबढ़ती आपसी दूरियों की हैकभी छोटे से कमरे से शुरू हुई इस कंपनी के मालिक ने अपने अपने कर्मचारियों के साथ मिलजुल कड़ी मेहनत और आपसी तालमेल से नई ऊचाईयों तक पहुचाया मगर ज्यो-ज्यो कंपनी आगे बढ़ती गयी आपसी तालमेल कहीं पिछड़ता चला गया अब भी मेहनत तो सब करते मगर पेशेवर तरीके से, किसी में भी अपने काम के प्रति पहले सा लगाव नहीं रहा किसी को किसी से कोई मतलब नहीं मालिक का ध्यान सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाने में रह गया था उसके साथ कंपनी के शुरूआती दिनों में जुड़े कई पुराने लोग अब सिर्फ कर्मचारी बन रह गए थे। जबकि कभी वे और कंपनी के मालिक काफी करीब थे।  

ज़्यादातर कर्मचारियों को छोड़कर सभी ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों, मालिक के लिए अगल से शानदार कैबिन तैयार हो गए थे अक्सर अपने कर्मचारियों के साथ बैठने वाले मालिक के कैबिन में अब बिना अपपोइंमेट लिए किसी का भी जाना मना हो गया था मालिक एवं ऊँचे पद पर बैठे कर्मचारियों लिए अब एक प्राइवेट बाथरूम भी बन गया था जहां भी बाकि कर्मचारियों के जाने पर पाबन्दी थी धीरे-धीरे ऑफिस…