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दिल्ली बदली अब देश बदलो लेकिन थोड़ा तरीका भी बदलो !

'आप' के लिए समय आ गया है कि केजरीवाल अब सीएम की कुर्सी मनीष सिसोदिया को सौंप कर केंद्र की राजनीति का रुख करें। देश की जनता के हित में काम करने का विचार रखने वाले मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर देश के विकास और उन्नति की नई परिभाषा तय करें।


बाक़ी गैर भाजपा शासित राज्य जो दिल्ली की तरह शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी लोककल्याणकारी नीतियों को लागू अपने नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे ज़रूरी शर्त सरकारों द्वारा किये जाने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाना है। उसके बादसरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर काबू पानाऔर उसके बाद उन्हें सर्वप्रथम अपने राज्य की जनता को मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने की ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जो उनके राजस्व के अनुकूल हों और जिन्हें सही मायनों में जनता को डिलेवर किया जा सके।


क्योंकि अरविंद केजरीवाल की सरकार का राजस्व मुफ्त बिजली-पानी देकर भी सरप्लस में रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया कहा गया है कि वर्ष 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दिल्ली सरकार का राजस्व सरप्लस में रहा ह…

क्या थीं इन अपराधियों की अंतिम इच्छा, यहाँ पढ़ें!

भारत सहित दुनिया के कई देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान आज भी मौजूद है। हालाँकि भारत में फांसी की सज़ा'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध की श्रेणी में आने वाले अपराधियों को ही दी जाती है। इस कठोर सज़ा के एक बार पक्के हो जाने के बाद ऐसी कई प्रक्रियाएँ होती हैं जिनसे जेल मेन्युअल के तहत हर मुज़रिम को गुज़ारना पड़ता है। ऐसी ही एक ख़ास प्रक्रिया होती है मुज़रिम की अंतिम इच्छा जानने की। जिसे जेल मेन्युअल के तहत मानवीय आधार पर हर मरने वाले से पूछा जाता है और फिर अधिकारी उस पर निर्णय लेते हैं कि क्या अपराधी की अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है या नहीं?


ऐसे में जब साल2020की शुरुआत में निर्भया के चार दोषियों को एक साथ फांसी की सज़ा दी जाने वाली है तो ये प्रक्रिया उनके साथ भी अपनाई जाएगी। हालाँकि अभीतक निर्भया के दोषियों से जुड़ी इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी मीडिया में नहीं आयी है। लेकिन इसी बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मृत्युदंड कुछ मुजरिमों ने अपनी कौन-सी ख्वाहिश अंतिम इच्छा के तौर पर ज़ाहिर की थी आइये उनके बारे में जानें।
माइकल नेय- नेपोलियन की सेना के इस बहादुर कमांडर ने अपनी मौत से पह…

दम तोड़ रहे नौनिहालों की लाशों पर आयोजित होगा योगा दिवस ?

नेता, मंत्री, बाबा, गुरु मीडिया जिसे देखों योग दिवस की तैयारियों में लीन है। उधर मुजफ्फरपुर में सरकारी लापरवाही से मरने वाले बच्चों का आँकड़ा 150 होने वाला है। वहीं हर बार की तरह इस बार भी योग के नाम पर करोड़ों स्वाहा होंगे, एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। योग को सभी बीमारियों का इलाज बताकर इतिश्री कर ली जाएगी।  लेकिन, न कोई ये सवाल करेगा न किसी को इसकी जरूरत महसूस होती है कि क्यों न इस बार योग के नाम पर खर्च होने वाले बजट से उन अस्पतालों के इलाज किया जाए जहाँ सुविधाओं की कमी है, जहाँ पलक झपकते ही मासूम बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते दम तोड़ रहें हैं। जहाँ ज़्यादातर बच्चे बीमारी से कम बल्कि बीमारी से लड़ने वाली सुविधाओं की कमी के चलते ज़्यादा मर रहे हैं।
बिहार में ढंग के अस्पताल नहीं हैं गोरखपुर में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं थे गुजरात के सूरत में 30 फिट की सीढ़ी नहीं थीं मगर योगा दिवस के नाम पर फूंकने कर लिए करोड़ों का बजट है। हो सके तो बहिष्कार कीजिए ऐसे दिखावे के दिवस का।बिहार में चमकी बुखार से 2014 में 355 2015 में 225 2016 में 102, 2017 में 54  2018 में 33 2019 में अब तक 138 बच्चों  की मौत…

आख़िर क्या है "नेशनल हेराल्ड" केस, आसान शब्दों में जानिए ?

देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू ने 1930 में#नेशनल हेराल्ड नामक अखबार शुरू किया। धीरे-धीरे इस अखबार ने 5000/- करोड़ की संपत्ति अर्जित कर ली। सन् 2000 में यह अखबार अचानक घाटे में चला गया और इस पर 90 करोड़ का कर्जा भी हो गया।“नेशनल हेराल्ड" (National Herald) की तत्कालीन डायरेक्टर्स, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सैम पित्रोदा और मोतीलाल वोरा ने, इस अखबार को यंग इंडिया (Young India Ltd) लिमिटेड नामक कंपनी को बेचने का निर्णय लिया।

किसकी कंपनी है यंग इंडिया ? पांच लाख रुपये से शुरू हुई यंग इंडिया कंपनी के बारे में मज़े की बात ये है किइसमें सोनिया और राहुल गाँधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेतामोतीलाल वोरा औरऑस्कर फर्नांडिस के पास है।
डील यह तय हुए थी कि यंग इंडिया, नेशनल हेराल्ड के 90 करोड़ के कर्ज़ को चुकाएगी और बदले में 5000 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति यंग इंडिया को मिलेगी।इस डील को फाइनल करने के लिए मोती लाल वोरा ने "तत्काल" मोतीलाल वोरा से बात की, क्योंकि वह अकेले ही, दोनों ही कंपनियों के डायरेक्टर्स थे।
अब यहाँ एक और नया मोड़ आया। वो ये कि 90…