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ये घोड़ा आपका है इसके इस्तेमाल से मत डरिये

दोस्तों अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि इंसान अपनी पसंद के जरूरत के बहुत से काम सिर्फ ये सोचकर नहीं करता कि दुनिया क्या सोचेगी,  पास-पड़ोस के लोग क्या कहेंगे। दरअसल अपने दैनिक जीवन मेंहमजितने तरह के लोगों से मिलते है उन सबके विचार हमारे प्रति अलग-अलग होते है। इन्हीं पराये विचारों के दबाव में आकर हम अपना आत्मविश्वास खो देते है, और न चाहते हुए भी गलत निर्णय ले लेते है। आज की ये कहानी ऐसे ही पिता-पुत्र के सफर से जुड़ी हुई है जहां दोनों पिता-पुत्र अनजाने लोगों की बातों में आकर बेवजह अपने सफर का आनंद गवां देते है।

एक बार पिता-पुत्र का एक जोड़ा व्यापार के सिलसिले में अपनेएक पालतू घोड़े पर सवार होकर घर से निकलता है। रास्ते में वे दोनों कई अनजान शहरों से गुजरते है। मार्ग में जब वे चाय-नाश्तें के लिए एकअनजान नगर में रूकते है तो एक अपरिचित व्यक्ति उन्हें टोक कर कहता है कि “भाई आप कैसे कठोर लोग है। एक बेचारे बेज़ुबान जानवर पर दो-दो लोग सवार है ये भी भला कोई बात हुई, शर्म करो।“
उसकी बातों से वे दोनों पिता-पुत्र स्वयं को दोषी मानकर फटाफट घोड़े से उतर जाते है। उसके बाद अपने बेटे के कहने पर बुर्जुग पिता घोड़े…

बिना मिनिमम बैलेंस की शर्त के कैसे खुलवाए एस बी आई में अपना खाता

नोटबंदी की मार झेल रहे छोटे मझोले कारोबारी एवं परिवारों को इस साल दूसरा जो सबसे बड़ा झटका लगा, वो था देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एस बी आई द्वारा ग्राहकों के खाते पर मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त एवं ए टी एम से निकासी एवं अन्य इस्तेमाल की सीमा पर भी भारी चार्ज एवं टैक्स लगानाआपको बता दें की देश के इस सबसे बड़े सरकारी बैंक के खाताधारियों की संख्या 31 करोड़ से अधिक है।
ऐसे में कई लोग जो इस प्रकार के नियमों से खासे नाराज़ है उन्हें ये भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करे? क्या वो एस बी आई का खाता बंद कर किसी और बैंक में खता खुलवा लें या फिर बेंकिंग सेवा से ही तौबा कर ले क्योंकि क्या पता जो शर्ते अभी एस बी आई ने लगाई है कल को वो बाकि अन्य बैंक भी लगाने लग जाए तो ग्राहक कहाँ जाए हालाँकि उड़ते-उड़ाते खबर ये है की एस बी आई अपने मिनिमम बैलेंस रखने के निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे दौबारा परिवर्तित कर सकता है मगर अभी ये खबर सिर्फ एक संभावना भर ही है ऐसे में एक एस बी आई बैंक के ग्राहक के पास ऐसे कौन से विकल्प बचते है जिससे वो अपने बैंक के ग्राहक भी बने रहे एवं मिनिमम बैलेंस वाली शर्त से भी आइये जानते है
एस बी …

जीवन ठेला गाड़ी.................

कुछ वक्त पहले यहीं पैसेफिक माॅल के पास इनका घर था। एक झोपड़ी थी, गैरकानूनी झोपड़ी। उसे एमसीडी वालों ने उजाड़ दिया। अब ये यहीं पास के डिवाइडर के अंदर खाली पड़ी जमीन पर रहते है। खुले आसमान के नीचे बीच सड़क पर। बाप-भाई इसी ठेला गाड़ी को चलाते है आज ये  ठेला गाड़ी इनके पानी ढोने-नहाने का ठिकाना बन गया।

आपका भी कोई बाबा है क्या ?

15 सालों की लम्बी लड़ाई के बाद आज आखिर दोनों ही गुमनाम महिलाओं को न्याय मिल ही गया। बलात्कार के दोषी तथाकथित धर्मगुरू रामरहीम को न्यायलय ने सश्रम 10+10 कुल 20 सालों की सजा सुनाकर एक बार फिर आम भारतीय के भरोसे को जीत लिया है।आप इसमें से 10  राम का नाम बदनाम करने और 10  रहीम का नाम खराब करने की सजा भी मान सकते हैं।हालांकी भारतीय कानून के अनुसार रामरहीम के पास उच्च न्यायलय में अपील करने का विकल्प अभी उपलब्ध है। रैप से लेकर पॉप सांग गाने वाला ये बाबा कितना रंगीन मिजाज था ये बताने की जरूरत अब शायद नहीं बची है। मगर यहां सोचने वाली बात ये है कि कैसे ये बाबा लोग इतने मजबूत हो जाते है कि देखते ही देखते ये देश की कानून व्यवस्था के लिए संकट एवं मौजूदा राजनीति के लिए सिरदर्द बन जाते है। कौन पालता है इन्हें या फिर किसके फलने-फूलने में सहायक होते है ये लोग? क्या इसके पीछे सिर्फ राजनेताओं एवं राजनीतिक दलों का निहीत स्वार्थ छिपा होता है या फिर उससे कहीं ज्यादा आम लोगों की वो भौतिक एवं आत्मिक आकंक्षाए जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वो सब ऐसे बाबाओं के द्वारा ही पूरी की जा सकती है। जिसमें खुशहाल वैभवश…

क्योंकि रोटी बड़ी मुश्किल से मिलती है!

कुछ दिनों पहले ये नजारा नोएडा सैक्टर सोलहा में देखने को मिला था। जरा सोचिए, जब कभी हमारें घरों के छोटे बच्चे ऐसी कोई उछल कूद करते है तब डर के मारे हमारी जान निकल जाती है। वहीं उस सबके उल्ट तकरीबन बारह-चैदह फिट की उॅंचाई पर चेहरे पर नकाब ढककर करतब दिखाती ये 10-11 साल की बच्ची और नीचे सड़क पर ढोल बजाकर लोगो को अपनी और आकर्षित करता उसका भाई और मां!

तब ये शेर यादा कि

!! हुनर सडकों पे तमाशा करता है
और किस्मत महलों में राज !!

!!जो दिया तुने बहुत दिया ए जिंदगी
बहुतों को तो ये भी नसीब नहीं होता!!

क्योंकि ये भगवान दिव्यांग है

ये दोनों दिव्यांग गणपति कल मुझे मेरे आॅफिस के पास नोएडा में मिल गए। कोई इन्हें सड़क किनारे रेडलाइट के पास छोड़कर चला गया। सच में ये दुनिया बहुत बुरी है इंसान हो या भगवान दिव्यांग हो जाए तो उसकी कोई कद्र नहीं रहती।

बनिया बनने में हजार-दो हजार वर्ष लगेगा आदिवासियों को: डा. रामदयाल मुंडा

आज डा.रामदयाल मुंडा का जन्म दिन है, वे हमारे बीच नहीं, लेकिन उनका एक साक्षात्कार मेरे पास है जो हमने 'देशज स्वर' के लिए लिया थाA उनकी मृत्यु के बाद यह 'जनसत्ता' में छपा और वंदनाकी पत्रिका 'अखड़ा' में भीA हमने उनसे नई औद्योगिक नीति और उदारीकरण के इस दौर में आदिवासी समाज पर मंडरा रहे अस्तित्व के संकट पर बातचीत की थीA बातचीत तो एक साक्षात्कार के रूप में शुरू हुआ, लेकिन एकाध प्रश्न के बाद ही सवालों का सिलसिला खत्म हो गया और वे खुद सवाल और जबाब बन गयेA यह बातचीत मोहराबादी स्थित उनके आवास पर हुई थी हम आंगन में तन कर खड़े आकाश छूते शाल वृक्षों की छाया में बैठे थे और सन्नाटे में तिर रही थी उनकी आवाज..
आज मैं अपने मित्रों के लिए उसे फिर से जारी कर रहा हूं.. बनिया बनने में हजार-दो हजार वर्ष लगेगा आदिवासियों को:डा. रामदयाल मुंडा सरप्लस एकानामी, मैनेजमेंट का एक पक्ष. यहां का आदमी बाबाजी हैA कल क्या खायेगा इसकी चिंता नहींA अब उसका पाला पड़ा है उन लोगों से जो प्रबंधन में, जोड़-तोड़ में माहिर हैं. जबकि आदिवासी डेमोक्रेसी, सुपर डेमोक्रेसी सब देख लिया, लेकिन मार्केट में एक दम फ्ल्…